भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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(४२०)

कवीरूपंयी-

क्षत्री कौन ?

सो क्षत्री जो जमा संभारे । काम क्रोध गुन हिरदय जारै ॥ काम क्रोध तन तजे गुमाना । सो क्षत्री रहे निरवाना ॥११॥

वैश्य कौन ?

सो वैश्य जो करै व्योपारा । सत्य शब्द ले हाट पसारा ॥ झूठ कपटको त्यागन कीन्हा । सब जीवनको भोजन दीन्हा ॥१२॥

शूद्र कौन ?

सोई शूद्र जो सेवा मन लीन्हा । आतमराम सकल घट चीन्हा ॥ सेवाको फल पावै सोई । जरा मरन दुख नासै दोई ॥ १३ ॥

बुलहा—कोरी कौन ?

सो बुलहा जो कोरै विधाना । बिन धरनीको बुने जो बाना । बाना बुनकै करै ठिकाना । खुवा प्रान जो वा घर जाना ॥१४॥

राजा कौन ?

राजा सो जो विलसे राजू । निसि दिन करै सत्यको काजू । हाथ अन्तर कबहुँ न धरई । सब जीवनकी रच्छा करई ॥१५॥

कायथ कौन ?

सो कायथ जो कथी विलोवे । पाप पुन्यका संसा खोवे ॥ मिथ्या वचन कबहुँ नहिं कहई । निसिदिन ओट नामकी गहई ॥१६॥

योगी कौन ?

सो योगी जो खोजे आपा । लिप्त न होवे पुन्य अरु पापा ॥ आपा मध्ये करै विचारा । काम क्रोध ते रहे निनारा ॥ १७ ॥

संन्यासी कौन ?

संन्यासी करै सबको न्यासा । काम क्रोधको मेटै फाँसा ॥ कनक कामिनि जीते झारी । सतगुरु शब्द दिल माहिं विचारी ॥१८॥

बैरागी कौन ?

सो बैरागी जो राग न करई । बीत राग होय जग संचरई ॥ व्यापक ब्रह्म घटहीमें देखे । सो बैरागी है हमरे लेखे ॥ १९ ॥

रामानन्दी कौन ?

रामहिं छाड़ि न आन ध्यावे । घट घट महाँ राम चित लावे ॥ भेदभाव कबहुँ नहिं माने । सो रामानन्दी साँच बखाने ॥२०॥