कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसंगलाचरण
(३९)
सतगुण वचन
(आगम संदेश)
धर्मनि सार भेद अव खोलौं । शब्दस्वरूपी घटघट बोलौं ॥ शब्दहिं गहे सो पंथ चलावे । बिना शब्द नहिं मार्ग पावै ॥ प्रगटे वचन चूरामनि अंशु । शब्द रूप सब जगत प्रशंसु ॥ शब्दे पुरुष शब्द गुरुराई । बिना शब्द नहिं जिवसुकताई ॥ जेहिते मुक्त जीव हो भाई । सुकतामनि सो नाम कहाई ॥
इतलिये-
शब्द कहै सो कीजिये, गुरुवा बडे लबार ।
अपने अपने स्वार्थको, ठौर ठौर बटमार ॥
ताते धर्मनिकर परचारा । बिना शब्द नहिं जीव उबारा ॥
शब्द गहे सो पंथ चलावे । बिना शब्द नहिं सत्य लखावे ॥
शब्द गहेसो भौ जलपारा । बिना शब्द नहिं जीव उबारा ॥
याते शब्द सनेही कीजै । जीवन जन्म सुफल करिलीजै ॥
ताते संग्रह कीन्ह यह, शब्दावलि धरि नाम ।
गुरु संतनको वन्दगी, बारबार परनाम ॥
॥ इति भङ्गलाचरण ॥
आगम संदेश जिसको चाहिये. इस पतेसे संग्रह सकता है. इसमें पंथका मविष्य पुरापुरा वर्णन है. मिलनेका पता—स्वामी श्रीगुलानन्द विहारी, कबीराश्रम पो खरसिया स्टेशन जि० विलासपुर. सी. पी. ॥