भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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(३८)

कबीरपंथी-

चार वेद अरु किताब पुनि, शास्त्र हदीस पुरान । भुगोल खगोल विज्ञान सब, शब्द प्रमाण ते जान ॥ ५ ॥ विना शब्द जगमें कहूँ, अहै न होवन हार । सतगुरु वचन प्रमाण है, मनमें लेहु विचार ॥ ६ ॥ शब्दे मारा गिर पड़ा, शब्दे छोड़ा राज । जिन जिन शब्द विवेकिया, तिनका सँबरा काज ॥ ७ ॥

इसलिये-

काज संवारे आपनो, वचन गुरुको मान । ८ ॥ “माने वचन सो वंश है” सतगुरु शब्द प्रमान ॥

परन्तु-

शब्द हमारा आदि का, सुनि मत जाहु सरख । जो चाहो निज तत्व को, शब्दे लेहु परख ॥ ९ ॥

इयोंकि-

शब्द विना सुरति आँधरी, कहो कहाँको जाय । द्वार न पावे शब्द का, फिर फिर भटका खाय ॥ १० ॥

किन्तु-

शब्द शब्द बहुअन्तरा, सार शब्द मथि लीजे । कहैं कबीर जहैं सार शब्द नहीं, धिग जीवन सोजीजे ॥ ११ ॥ सार शब्द पाये बिना, जीवहिँ चैन न होय । फन्द काल जेहि लखि पड़े, सार शब्द कहि सोय ॥ १२ ॥ सतगुरु शब्द प्रमान है, कहो सो बारम्बार । धर्मनिते सतगुरु कहै, नहिं बिनु शब्द उबार ॥ १३ ॥