कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
पृष्ठ 43, कुल 968 में से
संदर्भ में पढ़ेंसतसुकृत आदि अदली अजर अचित पुख्य सुनीन्द्र करणामय कबीर सुरतियोगसंतायन धनी धर्मदासकी दया वंश एकोत्तर की दया । कबीर साहब के अधिकारी वर्तमान आचार्य शिरोमणि श्री १०८ श्रीमहंत काशी दासजी साहब की दया सर्व महंत संतनकी दया ।
अथ कबीर पंथमें प्रचलित—
शब्दावली
मंगलाचरण
( संग्रह कर्ता का )
सतगुरु चरण सरोज रज; बार बार शिर नाय । शब्दावलि संग्रह करूं; सतगुरु होहिं सहाय ॥ १ ॥
इसते लाभ क्या—
धर्म, पंथ सब जगतके, ईश ब्रह्मलो जोय । शब्द प्रताप ते जानिये, सतगुरुके बल होय ॥ २ ॥
( सतगुरुका स्वरूप शब्दकी महिमा )
सत्यगुरु सत्य कबीर सो, शब्द रूप जगमान । धर्मदास सो शिष्य है, शब्द करे पहिचान ॥ ३ ॥
शब्द क्या बतलाता है ?
पापपुण्य अरु धर्म अधर्म, बन्ध मोक्ष लों जोय । शब्द प्रकाश ते जानिये, सूझ परत सब कोय ॥ ४ ॥