भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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सतसुकृत आदि अदली अजर अचित पुख्य सुनीन्द्र करणामय कबीर सुरतियोगसंतायन धनी धर्मदासकी दया वंश एकोत्तर की दया । कबीर साहब के अधिकारी वर्तमान आचार्य शिरोमणि श्री १०८ श्रीमहंत काशी दासजी साहब की दया सर्व महंत संतनकी दया ।

अथ कबीर पंथमें प्रचलित—

शब्दावली

मंगलाचरण

( संग्रह कर्ता का )

सतगुरु चरण सरोज रज; बार बार शिर नाय । शब्दावलि संग्रह करूं; सतगुरु होहिं सहाय ॥ १ ॥

इसते लाभ क्या—

धर्म, पंथ सब जगतके, ईश ब्रह्मलो जोय । शब्द प्रताप ते जानिये, सतगुरुके बल होय ॥ २ ॥

( सतगुरुका स्वरूप शब्दकी महिमा )

सत्यगुरु सत्य कबीर सो, शब्द रूप जगमान । धर्मदास सो शिष्य है, शब्द करे पहिचान ॥ ३ ॥

शब्द क्या बतलाता है ?

पापपुण्य अरु धर्म अधर्म, बन्ध मोक्ष लों जोय । शब्द प्रकाश ते जानिये, सूझ परत सब कोय ॥ ४ ॥