कबीरपंथी शब्दावली
Kabirpanthi Shabdavali
स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा
स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)
पृष्ठ 638, कुल 968 में से
संदर्भ में पढ़ें(६२४)
कबीरपंथी-
इदेहद मरा सब भाई ॥ अल्लहकी गत किनहुँ न पाई ॥
समै--कहते कहते वह गये, मिला न बहुरि संदेश ।
वाही संधिमें सब परे, अगुवाके उपदेश ॥
रमैनी २४६--जब अल्लाह तूफान उठाया । तबहिँ महम्मद किस्ती लाया ॥ बैठ किस्ती सब उतरे पारा । तूह भया सो खेवनहारा ॥ पुत्र भया उसका अन्याई । तूफान उठा तेहि दिया जुवाई ॥ कहर खुदाका जिस पर आवे । तिस बंदेको कौन बचावे ॥ यह आयेत कुरानमें आई । मुसलमान सब रहो लौलाई ॥
समै--इनही बातन सब जग भूला, करता परा न चीन्ह । पढ पढ बहुत किताबें जोही, अपना जी पै दीन ॥ जिस वृच्छका बीज था, लखावृच्छनहिं सोय । अकरताकरता सब मिले, डारा जियरा खोय ॥
रमैनी २४७--यह आयत कुरानमें आई । जहांते आया तहां समाई ॥ वह साहेब हम बंदा भाई । लाहुत ते सृष्टि किया पैदाई ॥ लम यलद व लम युलद कहाया । वह बेचून न लखे लखाया ॥ उसका नूर सकल पर छाया । वहांका थाहिं न किनहुँ पाया ॥ बहुर वहांकी हुकुम ते आया । कुन फैकुन कर पैद कराया ॥
समै--बाहर कोई ना हता, जो कछु लखे नमून । कहें कवीर वह भटकके, नाम धरा बेचून ॥ सब कहते बेचून है, नाहिं बसे वह सुन्न । कहें कवीर कहत न बने, यासे गुन गुन ॥
रमैनी २४८--ऐसी सुनी अकथ हम बानी । काजी मुलना कहें कहानी ॥ यह बेटा अल्लहको कहाया । कुमबइ जनी कहि सुवा जिलाया ॥ सो बहगये चौथे असमाना । खात मुलना करें बखाना ॥ मूसाते नूर अल्लह छिपाया । लितरानीका नूर दिखलाया ॥ देख नूर भया बेहोसा । अकल फहम सब भूले मूसा ॥ जो अल्लहका बंदा कहाई । सो बंदा वह भिस्तमें जाई ॥ यही बात तुरुक सब गावें । करताका कछु भेद न पावें ॥