भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

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शब्दावली

(६२३)

मुकाम ॥ पूरब राम पश्चिम रहिमाना । और मुलक किसका अस्थाना ॥ पूजा रचा बहुत चितलाई । राम न कबहुँ दृष्टि दिखाई ॥ रोजा निमाज मरा तुर्काना । कबहुँ न मिला नबी रहमाना ॥

समै--धोखे धोखे सब जग बीता, दो अगुवाके साथ ।

कहैं कवीर पड़े जो विगारी, अब काहे न आवे हाथ ॥

रमैनी २४३--वेदका भेद न काहू पाया । कहो पंडित जीव कहाँ ते आया ॥ करताका किस घर विसरामा । काया छूटे कहाँ मुकामा ॥ काजी मुलना पढे कुराना । ब्राह्मन भुले पढे पुराना ॥ अपने करताकी खबर न पाई । माया भरम रहा लौ लाई ॥ कर्मके बंधन तजे न कोई । ताते बिनसे पुरुष औ जोई ॥

समै--लिखा पठीमें सब परे, यह गुन तजे न कोय । सब परे भरमजालमें, डारा यह जिव खोय ॥ कुसल बिनासी सब दुनिया, दुनिया कुसले लाग । कहैं कवीर अब ना बूझे, घर घर लागी आग ॥

रमैनी २४४--सब तुर्कन मिल कीन्ह विचारा । लाख पैगम्बर भये असी हजारा ॥ तिन पर स्वतंम महम्मद पाई । किताब कुरान अल्लाह पठाई ॥ अमर नाहीं औ चार मुकामा । वस्ती छोड़ उजार विसरामा ॥ जबरील हुवा उनका दरमानी । यहाँ वहाँकी कहे कहानी ॥ दो इमाम भमे चार यारा । लौलाकलमाका भया षसारा ॥ जग करता बेचन कहायो । बीच कुरानके यह लिख आयो ॥ यहाँकी आस झूठी सब भाई । वहाँकी आस लिया तिन खाई ॥

समै- सबके पीर महम्मद, मोमन तिनके सुरीद ।

दोस्त अल्लहके ये भये, और जहान नादीद ॥

रमैनी २४५--काजी एक रवायत लाया । अजरोस सो बुत त्रास कहाया ॥ तिसका बेटा हुवा खलीला । मुसलमान भया कहे दलीला ॥ यह देखो भूलनकी बात । एक घरमें दो धरे जाता ॥ आगमें परा भया गुलजारा । गिरोह ले गया दरिया पारा ॥