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भारतकोश
कबीरपंथी शब्दावली

कबीरपंथी शब्दावली

Kabirpanthi Shabdavali

स्वामी श्री युगलानन्द विहारी द्वारा

स्रोत: Kabirpanthi Shabdavali - Yugalanand Vihari · श्री युगलानन्द विहारी (उद्गम)

Devanagarihipublished968 पृष्ठ

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पृष्ठ 802

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कबीरपंथी-

छाडे, जीव दगा ना देवै । दीन ईमान दया दिल धरिके, इलम इलाही लेवै ॥ आला इलम नहीं दिल आया, क्या अछा गोहराया ॥ हल किया हक ना हाजा, छूरी हलक हिलाया ॥ रब्ब रहीम करीम काहेका, अकरम कफ़र कराया ॥ रोजा वजू निबाज नबीका, सो ऐसा डहकाया ॥ हैदर हैदर करता डोलै, दर दर भया दिवाना ॥ जिस घरसे वह हैदर आया, तिस घर खबर न जाना ॥ का हैदर कादर है दरका, का हजरत का हक्का ॥ जियरत करे जहाँ जुल्मतकी, खबर नहीं दिल भक्का ॥ कवर मुकरबा महजिद सुरदा, पूज मलीदा सेती ॥ सुरगी बकरी गाय जबह कर, भया जाय जम हेती ॥ भया सुरीद न सुरदा छूटा, कैसा पीर तुम्हारा ॥ बदबखती बद बाद गई ना, गयो इमान खुवारा ॥ सुन्नत जबह न किया महम्मद, जे कुरान जग लाया ॥ रोजा वजू निमाज बंदगी, कलमा पांच पढाया ॥ मिहरबान दिल भया महम्मद, मारत जीव बचाया ॥ हिरनी और फाखता फांसी, जामिन देह छुडाया ॥ तुमको कौन सिखाया ऐसा, किया आप मनभाया ॥ दोजक जुबू स्वादके खातर, जीव जबह कर खाया ॥ जो कोइ कहे इब्राहीम, कीन्ह तो ऐसा ना कीन्हा ॥ हक हुकुम हक्के खातिर, बेटाका गल दीन्हा ॥ आंख मुंद बेटा गल देते, हुम्मा बदले आया ॥ मरा नहीं हरामी बोला, गुसा इब्राहिम लाया ॥ छूरी फैंक दर्ई असमाने, उहाँ टीडी गल दीना ॥ परी आय छूरी जल भीतर, दियो आय गल मीना ॥ हुमा टीडी मछली तीनो, बदलेमें गल दीन्हा ॥ फजल भया फरजंद बचाया, फिर ऐसा ना कीन्हा ॥ अपने बदले जो गल देवै, ताहि मार बया खाना ॥ कहैं कबीर सुनो भाइ मुसलम, रहिमत कहाँ समाना ॥

शब्द ५०-जोगियासे मेरा दिल लाग ॥ ८० ॥ जबसो प्रीति