कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 155, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें൲൲ श्रीकालिका पुराण ൲൲ १५७ इस जगत् की धात्री, लोकमाता हैं और आप माधवी क्षिति हैं। आप बुद्धि हैं और आप ही उसके विषय हैं, आप माता हैं और छन्दों की गति हैं आप गायत्री, वेदमाता और आप सावित्री तथा सरस्वती हैं। आप ही जब जगती की वार्ता हैं और आप कामरूपिणीत्रयी हैं। आप निद्रा के स्वरूप के द्वारा प्राणी हैं तथा निर्जर आदि हैं। निर्जर देवों का नाम है जो स्वर्ग आदि के स्थान वाले हैं उन सबको आप सुख देती हुई प्रकट रूप से मोहयुक्त किया करती हैं। आप पुण्य कार्य करने वालों के लिए लक्ष्मी हैं और जो पाप कर्म किया करते हैं, उनके लिए साक्षात यातना हैं। उसी भाँति जो नीति के धारण करने वाले पुरुष हैं उनके लिए श्री हैं और नैतिकी धृति सुख देने वाली हैं। आप सब जगतों की शान्ति हैं और आप चन्द्र में गोचर होने वाली कान्ति हैं। आप समस्त प्राणियों की धात्री हैं और आप विष्णु का मोहन करने वाली लक्ष्मी हैं। आप भूतों के तत्त्व रूप वाली हैं और आप पाँचों भूतों की सार करने वाली हैं। त्रिलोकी की महामाया हैं। भगवान महेश्वर सर्वभूत को संसार चक्रों में समारोपिति करके जैसे भ्रमण कराते हुए हैं, हे महेश्वर! वह माया आप ही हैं। आप जय से युक्तों की जयन्ती, ह्रीं, विद्या, उत्तमा नीति हैं, आप सामदेव की गीतिका हैं, आप चतुर्वेदों की ग्रन्थि और हृति हैं। आप समस्त देवों के समुदाय के प्रपंच को एक ही करने वाली हैं। जो स्तुति नहीं हुई वह आप यहाँ भव्य के करने वाली होवें। इस संसाररूपी महासागर की महान् कराल तरंगों के दुःखों से विस्तार करने वाली तरणि हैं। जो स्थिति की रीति से हीन हैं। जो अष्टांग रूप परम पावन केलिगीत के विक्षेप करने वाली हैं उसको निश्चय ही हम प्रणाम करते हैं। आप नासिका, नेत्र, मुख, भुजा और वक्षःस्थल में और मानस में सुखों को धारण करके सदा ही जन्तु का पालन किया करती हैं, जो संसार में होने वालों सुभगा निद्रा हैं, ऐसे जानी जाया करती हैं यही आप हमारे ऊपर धृति, स्मृति और वृत्ति रूप वाली प्रसन्न होवें। जो सृष्टि स्थिति और अन्त में रूप वाली अथवा सृजन, पालन और संहार करने वाली