भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 209, कुल 442 में से

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पृष्ठ 209

൵ श्रीकालिका पुराण ൵ २११ निधापित कर दिया था। जल के प्रकृति में समापन्न होने पर वरीरिका को शृंग में बाँधकर एक सहस्त्र देवों ने वर्षों तक उस नौका को सम्प्रेरित किया था। परमेश्वर प्रभु ने अपनी नाव को अवष्टन्ध करके धारण किया था। जगत् की धात्री योगनिद्रा उस बटीरिका में समासीन हो गयी थी। फिर धीरे-धीरे चिरकाल में जल के शोषण हो जाने पर उस जल के मध्य में पश्चिम हिमालय पर्वत का शिखर सुमग्न हो गया था। हिमालय प्रभु के जो दो सहस्त्र योजन ऊंचा था उसके पचास सहस्त्र उच्छिष्ट (ऊँचा) शृंग था। फिर उस शृंग में उस नाव को बाँधकर मत्स्य के स्वरूप को धारण करने वाले हरि जो जगतों के स्वामी थे उन जलों शोषण करने के लिए तुरन्त गये थे। इसी रीति से भगवान् शार्गधारी विष्णु ने मत्स्य के स्वरूप के द्वारा वेदों की रक्षा की थी। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-कपिल मुनि के शाप से यह आकालिक लय किया गया था। क्योंकि यह अकालिक लय भगवान् के द्वारा ही किया गया था। हे द्विज सप्तमों! यह जैसा हुआ था वैसा ही हमने आपको वर्णन करके बतला दिया है।

श्रीकूर्म अवतार कथा

मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-इस अकाल प्रलय के होने के पश्चात् पुनः जिस प्रकार से सृष्टि की रचना हुई थी। हे द्विजसत्तमो! जिसने इस पृथ्वी का उद्धार किया था उसका अब आप लोग श्रवण कीजिए। उस प्रलय के व्यतीत हो जाने पर उस महान बलवान कूर्म के स्वरूप वाले विष्णु भगवान् ने पर्वतों के सहित पृथ्वी को उद्धृत करके अपने पृष्ठ भाग पर धारण कर लिया था और परमेश्वर ने पूर्व की ही भाँति सम्पूर्ण पृथ्वी को समान कर लिया था। शरभ और वाराह का और उनके पुत्रों से पदक्रम से जो भी भूमि विशीर्ण हो गई थी कर्मठ देव ने उसको भी सम कर दिया था। परमेश्वर ने पूर्व की भाँति पृथ्वी को सम करके फिर पृथ्वी के तल में संस्थित अनन्त भगवान् को धारण किया था। इसके अनन्तर ब्रह्मा, विष्णु और हर परमेश्वर ने वहाँ पर

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