कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 210, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमागत होकर नौका के बीच में विराजमान सात मुनियों को स्वायम्भुव मनु की और दोनों पर नारायणों को और दक्ष को कहने लगे थे-समस्त मुनिगण, पर नारायण, दक्ष और स्वायम्भुव मनु आप सब लोग श्रवण करिए कि जो भी कुछ इस समय में हम बतलाते हैं। वाराह और शरभ के युद्ध से परिपूर्ण सृष्टि विनष्ट हो गई है। अतएव हमको जिस रीति से सृष्टि की रचना करनी चाहिए उसे आप लोग श्रवण करिए। ये दोनों नर और नारायण सृष्टि की रचना करने के ही लिए समुपस्थित हो गये हैं। देवों की संस्थापना करने के लिए परम तप का तपना करें। जनलोक में रहने वाले देवों को ये दोनों आप्यापित करके अपरों को यहाँ समानीत करें और निरन्तर बहुत से गणों का भली-भाँति सृजन करें। हे मुने! नक्षत्रों की, ग्रहों की और उनके स्थानों का सृजन करें। इन दोनों की तपश्चर्या से पूर्व की ही भाँति स्थिरता को प्राप्त होवें। यह महाभाग जनार्दन प्रभु सूर्य के रथ का संस्थान तथा चन्द्रमा के रथ की संस्थत को स्वयं ही करें। हे स्वायम्भुवन मनु! आप पृथ्वी में सब चीजों का चयन करें और पृथ्वी सभी ओर सैशस्यों से परिपूर्ण हो जावे। समस्त औषधियाँ वृक्ष-लता और बल्लियों का सभी ओर आप पुरोहण करें। प्रजापति दक्ष सप्त मुनीन्द्रों के साथ यज्ञ के द्वारा भगवान हरि का अभ्यर्चन करें और वाराह के पुत्रों से समुत्थित इन तीनों अग्नियों का भी यजन करें। आह्वनीय आदि तीन अग्नियाँ होती हैं। यह यज्ञ सृष्टि की रचना के ही लिए वाराह भगवान् के देह से समुद्भूत हुआ था। इसी यज्ञ के द्वारा दक्ष इस सृष्टि की रचना का विस्तार करें। नर और नारायण से तथा सात मुनियों से, दक्ष और आप से भी, यज्ञ से तथा दोनों अग्नियों से इस सृष्टि को स्वर्ग, पाताल और भूमि में सम्पूर्णता को प्राप्त होवे और सृष्टि को आप्यापित करके जिस प्रकार से भी यह सुसम्पन्न हो जावे, यत्न उसी भाँति का करेंगे। आप नित्य ही सृजन का कार्य करिये। इस अनन्तर यह सृष्टि जैसे पहले थी ठीक वैसी ही सुसम्पन्न हो जावे। हे मनु देव! सबसे प्रथम आप इस समय में बीजों का प्ररोहण करें। मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-इस रीति