कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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[Main Text] वह गुणवान था जो सदा प्रजाओं को तप देता है। वह ही आपका मुख्य वंश के करने वाला कहा जाता है जो कि दिवाकर है। दिति का एक पुत्र था वह गुणवान था जो सदा प्रजाओं को तप देता है। वह ही आपका मुख्य वंश के करने वाला कहा जाता है जो कि दिवाकर है। दिति का एक पुत्र था जो महान बलवान हिरण्यकशिपु नाम वाला हुआ था। उस हिरण्यकशिपु के चार पुत्र थे जो परम हृष्ट और मद तथा बल से समन्वित थे। उनके नाम प्रह्लाद, सलुयाद, वाष्क और शिव थे। प्रह्लाद के तीन पुत्र हुए थे उनमें जो सबसे आदि में हुआ था उनका नाम विरोचन था। कुम्भ, निकुम्भ, बलवान ये तीनों ही प्रह्लादि कहे गये थे। विरोचन के एक सुत समुद्भूत हुआ था जो दान देने में परम श्रेष्ठ एवं विख्यात था उस महान् का नाम बलि था और जो बलि का पुत्र हुआ था वह महान बल वाला बाण नाम से कहा गया था। वह श्रीमान् शम्भु का अनुचर हुआ था और वह महाकाल नाम वाला था। उस बाण के एक सौ पुत्र हुए थे जो कुसुम्भ, मकर आदि नाम वाले थे। दनु के चालीस पुत्र हुए थे उनके नाम बतलाये जाते हैं—शम्बर, नमुचि, प्रलोमा, असिलोमा, केशी, दुर्जय, अप, शिर अश्वशीर्ष, क्षय, शंकु, वियन्मूर्धामहा, बल, वेगवान, केतुमान, स्वर्भानु, अश्व, पति, कुण्ड, वृष, पर्वाजक, अश्वग्रीवा, सूक्ष्म, तरुण्ड, माण्डल, उर्ध्वबाहु, एकचक्र, विरूपाक्ष, हर, आहर, नियन्त्र, निकुम्भ, सूर्य, चन्द्रमा, अन्य ये तीनों पुत्रों के पुत्र थे तथा सूर्य और चन्द्रमा, (दिवाकर, निशानाथ) दोनों देवपुंगव थे। उनके पुत्र और पौत्र तथा उनके पुत्र बहुत से थे। इस सबसे यह जगत् व्याप्त हो रहा है जो कि ये सब बल और वीर्य से समन्वित थे। दनायु के विशेष बलवान चार पुत्र हुए थे। उनके नाम ये हैं—वीरभद्र, विक्षर, वत्स और वृत्त। हे द्विजोत्तमों! इन चारों के बहुत से पुत्र समुद्भूत हुए थे जो सब ही रूप एवं बल से समन्वित थे और इन एक-एक के सौ-सौ पुत्र समुत्पन्न हुए थे। वे चारों दानवों के स्वामी महान् वीर्य, पराक्रम वाले और परम विख्यात हुए। विनाश, क्रोध तथा