कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें२१६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ क्रोधहन्ता और क्रोधशक्र ये काला के पुत्र बताये गए हैं। सिंहिका का पुत्र राहु उत्पन्न हुआ था जो चन्द्र और सूर्य का मर्दन करने वाला है। सुचन्द्र, चन्द्रहन्ता, चन्द्रविमर्दन, वेगवान्, केतुमान, अयः, सुर्भानु, अश्जोद्यपति, क्रष्टु, अष्टपर्वा, जरु ये सब पुत्र हुए थे। क्रोधा के जो पुत्र हुए थे वे क्रूर कर्मों के करनेवाले थे। सिंहिका और क्रोधा ये दो पुत्रियाँ हुई थीं जो सदा ही क्रूरिकायें थीं। उन दोनों से जो वंश समुद्भूत हुआ था इसलिए वह क्रूरतर कहा गया है। एक ही मुनि का पुत्र उत्पन्न हुआ था जो शुक्र नाम वाला था और महान् कवि हुआ था। यह दैत्य, दानव और कालेय आदि का वह सदा ही गुरु था। उसके चार सुत समुत्पन्न हुए थे जो असुरों को यजन कराने वाले थे। उनके नाम त्वष्टाचार, अत्रि, सौकल और वाग्मी थे। ये तेज में सूर्य के ही सदृश हुए थे। क्रोधात्माओं के तथा सिंहिका के पुत्र की सूति और प्रसूतियों के द्वारा यह सम्पूर्ण चराचर जगत व्याप्त हो रहा है। अर्थात् इनके पौत्र प्रपौत्र आदि इतने अधिक थे कि यह सब जगत उनसे व्याप्त हो गया था। हे द्विजो! उनके जो सन्ततियां क्रम से बढ़ी थीं उनकी अत्यधिक संख्या थी कि बहुत समय लगाकर भी उसकी गणना नहीं की जा सकती है। विनता के पुत्र तार्थ्य, अरिष्टनेमि, अनूप, गरुड़, आरुणि, वारुणि ये सब समुत्पन्न हुए थे। शेष वासुकिराज, तक्षक कुलिन, कर्म, सुमना ये सभी काद्रवेय नाम कहे गये हैं। भीमसेन, उग्रसेन, सुवर्ण, गरुड़, गोपति, धृतराष्ट्र, सूर्य, वर्चर्चा, वीर्यवान्, अर्क, दृष्ट, प्रयुक्त, विश्रुत, सुश्र, भीम, चित्र, रथ, विख्यात, सर्वविद्, वली, शालिशीर्ष, पर्जन्य, कलि, नारद ये सब देव, गन्धर्व देव और मुनि पुत्र कीर्त्तिक किये गए हैं। अनवधा, सानुरागा, संवरा, मार्गणा, प्रिया, असूया, सुभगा और भीमा इस कन्याओं को प्रसूत किया था। समस्त गुणों के समुत्थान स्वरूप तप के ही धन वाले कश्यप मुनि से प्राधा ने विश्वावसु, सुचन्द्र, सुवर्ण, सिद्ध, वह्नि, पूर्ण, पूर्णांक, ब्रह्मचारी, रतिप्रिय और भानु ये दश पुत्रों को जन्म दिया था जो कि प्राधापुत्र कहे गए हैं। ये सब देव गन्धर्व थे जो निरन्तर पुण्य लक्षणों वाले थे।