भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 215, कुल 442 में से

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पृष्ठ 215

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २१७ अलम्बुषा, मिश्रकेशी, गामिनी, मनोरमा, विद्युतपन्ना, पनघा, रम्भा, अरुणा, रक्षिता, अतुला, सुबाहु, सुरता, मुरजा, सुप्रिया, वपु, तिलोत्तमा ये सब प्रमुख अप्सरायें कही गयी हैं । अति, बाहु, तुम्बरु, हाहा, हूहू, ये सब गन्धर्वों में मुख्य हुए हैं जो देवों के ही तुल्य कीर्तित किये गये हैं । अमृत, ब्राह्मण, गौऐं, मुनिगण, अप्सरायें ये कपिलातनय कहे गये हैं जो महान् भागों वाले और महान उत्सवों वाले हैं । इस प्रकार से ये दक्ष प्रजापति की सुताओं के पुत्र कश्यप ऋषि से समुद्भूत हुए बताये गये हैं । उनके द्वारा ही यह सम्पूर्ण स्थावर, जंगम अर्थात् जड़-चेतन व्याप्त हो रहा है । इस प्रकार से यज्ञ के स्वरूप वाले यज्ञ वाराह के पतन से तीन अग्नियों से उन महात्मा मनु स्वायम्भुव उत्पन्न हुए थे । सात मुनियों से ओर कश्यप आदि से नर नारायण से अकालिक लय से व्यतीत हो आने पर पुनः पहले अनेक रूप वाले हरि के द्वारा प्रजा का सृजन किया गया था । उन नर नारायण के स्वरूप वाले तथा सृष्टि-स्थिति और संहार के करने वाले भगवान हरि के प्रसाद से पुनः यह सृष्टि हुई थी । शरभ काया त्याग का वर्णन मार्कण्डेय महर्षि ने कहा- हे द्विजश्रेष्ठों! ईश्वर ने शरभ शरीर को यत्नपूर्वक जिस तरह से परित्याग किया था उसे कहने वाले मुझसे पुनः आप लोग श्रवण कीजिए। यज्ञ वाराह के निहित हो जाने पर लोकों के पितामह ब्रह्माजी ने शरभ के समीप में जाकर साम से युक्त अर्थात् परमशान्तिपूर्वक जगत् के हित की बात कही। ब्रह्माजी ने कहा था कि आपके देह के उपभोग अर्थात् विस्तार से बहुत से योजन तक यह स्थल पूरित हो गया है । इस कारण से आप लोकों को भय देने वाले शरीर का उससे हरण कीजिए । आपके युद्ध से ही यह सम्पूर्ण तीनों भुवन नष्ट हो गये । आज भगवान जनार्दन भयभीत हो रहे हैं । इस कारण से आप ऊपर के लोकों की भलाई के लिए इस शरीर का परित्याग कर दीजिए ।

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