कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंइन्द्र का अनिष्ट करने वाला जो कोई भगवान् विष्णु की समाराधना किया करता है उसको सच्छिद्र वरदान देकर उसका विनाश करते हैं। चिरकाल आराधना किए हुए भगवान् विष्णु अभीष्ट काम प्रदान करते हैं और शरीर से कष्ट सहकर पूजा करने पर वे परम प्रसन्न हो जाया करते हैं। इष्ट देवता की भी पूजा के बिना कौन पुरुष अतुल विभूति को प्राप्त किया करता है अर्थात् कोई भी नहीं। पुराने समय में ऐसा कहीं भी कोई पुरुष नहीं सुना गया है। तुमने पूर्व में ब्रह्मा अथवा भगवान् विष्णु की आराधना नहीं की है। इसी कारण तुमको आप ही विघ्न समुत्पन्न हुए हैं। भगवान् विष्णु जो स्वभाव से ही अनुकम्पा करने वाले हैं तुम्हारे पालन करने वाले नहीं हो रहे हैं किन्तु तुमने पृथिवी के कथन से पुनः उनकी आराधना की थी। आपको द्विजों का अपराध नहीं करना चाहिए अन्यथा इससे आप हतश्री हो जायेंगे- ऐसा हमने सुना हैं। आपने परम श्रेष्ठ वसिष्ठ मुनि का अपराध किया है। हे भूप! इसीलिए उस स्मरण मात्र से पृथिवी और विष्णु नहीं पधारे। हे मित्र! इस कारण से आप भगवान् की बुद्धि की कुटिलता को समझ लीजिए। हे भौम! इस समय आपकी उदासीन आकृति का होना ठीक नहीं। जो तुम्हारे मन में यह है कि यह मेरे तात हैं ऐसा विश्वास है तो दूसरे लोक में चले गये हैं क्योंकि वाराह ही आपके पिता थे। वह चले गये हैं। वाराह भी हरि भगवान् का ही अंश है जिनका आप सेवन किया करते हैं। शम्भु भगवान् के प्रसन्न होने पर ये सभी शीघ्र ही क्षय को प्राप्त हो जायेंगे। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-उस समय बाण के वचन से नरक को पूर्ण विश्वास हो गया था। वह बहुत ही प्रसन्न होकर धीरता से घर्घर ध्वनि करता हुआ यह वचन बोला। भौम ने कहा-हे मित्रों पर प्यार करने वाले! जो भी अपने कहा है वह मेरा हितकर है अर्थात् भलाई करने वाला है। अब मैं तुरन्त ही उत्तम तपश्चर्या करूँगा। मुझे भगवान् विष्णु की आराधना नहीं करनी चाहिए क्योंकि उसमें हेतु बतला दिया है। उसी भाँति शम्भु भगवान की भी आराधना नहीं करनी चाहिए क्योंकि वे मेरे पुर में अन्तर्गुप्त हैं।