भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 227, कुल 442 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 227

ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २२९ कहा था। पृथ्वी देवी को विदा करके सभी देवगण सनातन माधव को भूमि के भार के उतारने के विषय में विचार करने लगे। प्रभु ने परम प्रसन्न होकर समस्त सुरों से कहा कि वे सब भूमि भार को उतारने के लिए अपने-अपने अंशों से अवतरित होवें। इतना कहकर प्रभु स्वयं भी यहाँ पर भार के अवतारण में देवकी के गर्भ में अवतीर्ण हुए थे। स्वयं भगवान् विष्णु को अवतीर्ण जानकर, जो कि सनातन हैं, उन देवगणों ने रम्भा और तिलोत्तमा आदि देवियों को उत्पादित कर दिया था। वे सब परम श्रेष्ठ नारियाँ हिमालय के पृष्ठ भाग पर क्रीड़ा करने वाली थीं। उनको भूमि के पुत्र नरक ने देखा था और बलपूर्वक उसने हरण कर लिया। उस नरक ने उन सबको घर्षित किया था और अपने प्राग्ज्योतिष नरक में उन सबको ले आया था। नरक ने मैथुन के समय उनसे प्रार्थना की थी। उन्होंने कहा हे भौम! जब तक देवर्षि नारद तेरे नगर की ओर आते हैं तब तक आप हमारी रक्षा करें और मैथुन के प्रति हमको छोड़ देवें। वे शीघ्र ही हमारी प्रात अनुग्रह करके हे वीर! आपके समीप में आयेंगे। उनके द्वारा देखी गयीं हम सब तुम्हारे साथ संगम करने के लिए आ जायेंगी। उनके द्वारा इस प्रकार से प्रार्थना किए जाने पर नरक ने उस अवसर पर ब्रह्माजी के वाक्य का स्मरण करके 'ऐसा ही होवे' -यह उसने कहा था। इसी बीच में लोकों की रक्षा करने वाले भगवान् देवकी के गर्भ से समुत्पन्न हुए थे और नन्द के घर में पालित होकर बड़े हुए। उन प्रभु ने कंस, केशी और प्रलंब आदि अनेक दैत्यों को मार कर जल से अन्दर सागर में बसी हुई द्वारका पुरी में निवास किया। वहाँ पर उन्होंने अपने धर्म से आठ कन्याओं को स्वीकार किया था। उनमें मानवी के रूप वाली कालिन्दी थी वह रमणी, नग्नजित् की पुत्री थी। सत्या, चारुहास वाली लक्ष्मणा, परम सुशील और शील से सम्पन्न सती जाम्बवती थी। बलदेव के मित्र को इन नारियों में अनुराग करते छत्तीस वर्ष व्यतीत हो गये। हे द्विज श्रेष्ठो! उसके महान् बल वाले इस प्रकार से प्रद्युम्न, साम्ब जिनमें प्रमुख थे ऐसे पुत्र समुत्पन्न हुए थे जो शास्त्र में और शस्त्र विद्या में परम पण्डित थे।