कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंॐ श्रीकालिका पुराण ॐ २७ [काली स्तुति वर्णन] मार्कण्डेय मुनि ने कहा- इसके अनन्तर उस समय ब्रह्माजी ने महान् आत्मा वाले दक्ष के लिए और मरीचि प्रमुख मुनियों से यह वचन कहा था। ब्रह्माजी ने कहा- भगवान् शम्भु की पत्नी होने वाली कौन है जो उनको मोहित कर देगी? इसी का ध्यान करते हुए उन्होंने शिव की कान्ता के विषय में मन स्थिर करने का उत्साह नहीं किया था। हे दक्ष ! जगन्मयी, महामाया, विष्णु की माया के बिना तथा सन्ध्या, सावित्री और उमा के अतिरिक्त अन्य कोई भी उनका सम्मोहन कर देनेवाली नहीं है। इसी कारण मैं इस जगत् को प्रसूत करने वाली भगवान् विष्णु की माया योगनिद्रा का स्तवन करता हूँ क्योंकि वही अपने सुन्दरतम स्वरूप से भगवान् शंकर को मोहित करेगी। हे दक्ष! आप तो उसी विश्व के स्वरूप वाली का यजन करो जिसके करने से वह आपकी पुत्री होकर भगवान् की पत्नी होगी। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-इस प्रकार के ब्रह्माजी के वचन का श्रवण करके मरीचि आदि के द्वारा पूजित दक्ष ने सृजन करने वाले ब्रह्माजी से कहा था। दक्ष प्रजापति ने कहा-हे लोकों के ईश! हे भगवान् ! जो परमतथ्या और जगत् का हित करने को अपने कहा है वह मैं भली-भाँति करूँगा जिससे उसके मन को हरण करने वाली समुत्पन्न हो जावे। मैं ठीक उसी भाँति का हो जाऊँगा जिस प्रकार से मेरी पुत्री स्वयं ही महात्मा शम्भु की पत्नी होकर विष्णु की माया हो जावे। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-उस वेला में मरीचि जिनमें प्रमुख थे उन सभी ऋषियों ने इसी प्रकार होवे यही कहा था। फिर प्रजापति दक्ष ने जगत् से परिपूर्ण महामाया का अभ्यंजन करना आरम्भ कर दिया था। क्षीरोद के उत्तर में नीर में स्थित होकर उस देवी को अपने हृदय में विराजमान करके अर्थात् उसका अपने मन में पूर्णतया ध्यान करके प्रत्यक्ष रूप से अम्बिका के अवलोकन करने के लिए तपस्या का समाचरण करने के लिए आरम्भ कर दिया था। नियत होकर संयत आत्मा वाले और सुदृढ़ व्रत से संयुत होते हुए तप किया था। उस तप