भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 442 में से

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पृष्ठ 27

२८ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ करने के समय में आरम्भ में केवल वायु का आहार, फिर बिना आहार किए हुए और जल का ही केवल आहार तथा पत्तों को आहार करने वाला वह दक्ष रहा था। दक्ष के तप करने के लिए चले जाने पर समस्त जगत् के पति ब्रह्माजी परम पवित्र से भी पवित्रतम परम श्रेष्ठ मन्दराचल के समीप चले गए थे। वहाँ पहुँचकर जगत के धात्री जगतमयी विष्णु के माया का वचनों के द्वारा और अर्घ्यों से एक मन होकर सौ वर्ष तक स्तवन किया था। ब्रह्माजी ने कहा-विद्या और अविद्या के स्वरूप वाली, शुद्धा, बिना अवलम्ब वाली, निराकुला जगत् की धात्री और स्थूल और अवर्णनीय स्वरूप से समन्विता देवी का स्तवन करता हूँ। जिससे यह जगत् उदित होता है जो प्रधान नामक है और जगत् से परे है। जिससे उसी के अंशभूता सनातनी निद्रा आप हैं ऐसा आपका मैं स्तवन करता हूँ। आप परमानन्द स्वरूपा चिति हैं, आप परमात्मा के स्वरूप वाली हैं, आप समस्त प्राणियों की शक्ति हैं और आप सबको पाचन करने वाली हैं। आप सावित्री हैं, आप इस जगत् की धात्री हैं, आप ही सन्ध्या, रति और धृति हैं और आप ही ज्योति के स्वरूप के द्वारा इस संसार में प्रकाश करने वाली हैं। यथा आप अपने तम के स्वरूप से सदा ही इस जगत् को आच्छादन करती हुई स्थित रहा करती हैं। आप ही सृष्टि के सृजन स्वरूप से इस संसार को परिपूर्ण करने वाली हैं। आप मेधा हैं, आप महामाया हैं, आप पितृगणों को मोह देने वाली स्वधा हैं, आप स्वाहा हैं तथा समस्कार और वषट्कार एवं स्मृति हैं। आप पुष्टि तथा धृति, मैत्री करुणा तथा मुदिता हैं। आप ही लज्जा, शान्ति, कान्ति और जगत् की ईश्वरी हैं। आप महामाया स्वाहा और पितृ देवता स्वधा हैं। जो हमारी सृष्टि की शक्ति हैं और जो हरि की स्थिति की शक्ति हैं, हे सनातनी ! आप ही शक्ति हैं। आप एक ही दश प्रकार की होकर मोक्ष और संहार के करने वाली हैं। विद्या और अविद्या के स्वरूप से आप स्वप्रकाशा और अप्रकाश हैं। आप ही समस्त प्राणधारियों की लक्ष्मी हैं, आप ही छाया और सरस्वती हैं।