भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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२७२ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐॐ व्याधियाँ नहीं होती हैं और वह दीर्घायु हो जाता है । यह परम पवित्र है और कल्याण करने वाला है । इसका एक बार भी श्रवण करके मनुष्य शिवलोक का गमन किया करता है । जो श्राद्ध में आमन्त्रित विप्रों को इस महत् कालिका चरित्र का श्रवण कराता है उनके पितृगण कैवल्य को प्राप्त किया करते हैं, इसमें तनिक भी संशय नहीं है । आप लोगों के सामने यह परम पुण्यमय और समस्त पापों का विनाशक कह दिया है । हे सत्तमो! अब आप लोगों को जो भी रुचता हो, जो भी कुछ अन्य हो उसका श्रवण करिए । गौरी-शिव विहार वर्णन ऋषियों ने कहा- हे ब्रह्मन्! यह काली और हर का समागम अतीव विचित्र आपने वर्णन किया है जो यह परम पुण्यमय, पापों का हरण करने वाला, नित्य और श्रेष्ठ तथा श्रवण करने में सुख प्रदान करने वाला है । अब आप पुनः शिव का उत्तम तनु का अर्धभाग काली अथवा गौरी ने कैसे हरण किया था। वह कालिका किस प्रकार की है । हे मुनियों में श्रेष्ठ! हे द्विजो में उत्तम! किस कारण से शीघ्र ही काली गौरीत्व को प्राप्त हो गई । हमको यह तात्त्विक रूप से कहिए । मार्कण्डेय मुनि ने कहा-इस महान् आख्यान को इस समय में आपके समाने कहूँगा । हे महर्षि गणों! इस परम शुभ देने वाले का आप लोग सब श्रवण कीजिए । यही बात पहले समय में राजा सगर ने और्व मुनि से पूछी थी । उन्होंने जिस प्रकार से कहा था वही मैं आप लोगों को बतलाता हूँ । प्राचीन समय में सोमवंश में एक सगर राजा हुआ । वह बलशाली, श्रीमान्, दक्ष और शास्त्रों के अर्थों का पारगामी विद्वान् था । वह राजा अपने एक ही रथ के द्वारा समस्त नृपों को जीतकर चक्रवर्ती हो गया था । उस राजा सगर को अभिनन्दित करने के लिए मुनिगण समागत हुए थे । पूर्व दिशा, उत्तर, दक्षिण तथा पश्चिम के मुनिगण और ब्राह्मण नृप के दर्शन करने के लिए समागत हुए थे । सबके समागत