भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 277, कुल 442 में से

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पृष्ठ 277

हैं और मार्ग में उस बियाबान में एकाकी विचरण कर रहे हैं। हे नर श्रेष्ठों! यह मेरे कथित का आप उत्तर बताइये। इसके अनन्तर उन दोनों ने इनको प्रणिपात किया था और समजस सम्भाषण किया था अर्थात् समुचित बातचीत की थी। उन शंकर के दोनों पुत्रों ने कपोत नाम वाले मुनि श्रेष्ठ से कहा था-हे मुनि शार्दूल! हम दोनों चन्द्रशेखर के पुत्र हैं और तारावती के उदर से समुत्पन्न हुए हैं। आप हमको जान लीजिए । हम आपके पदों में प्रणाम करते हैं। हम दोनों की राजा से निरन्तर अवज्ञा देखकर क्रोध से संयुक्त होते हुए हम सदा ही अकेले ही निर्जन वनों में भ्रमण करते हैं। सर्वदा प्रणत रहने वाले आत्मज पुत्रों की अवज्ञा करके नृप किसलिए हे महाभाग! दानमात्र को भी देने की इच्छा नहीं करता है। हे द्विज श्रेष्ठ! इसी कारण से हम दोनों तप का समाचरण करने के लिए इच्छा कर रहे हैं यदि आप उपदेश के द्वारा हमारे ऊपर अनुग्रह करते हैं। इसके अनन्तर उन दोनों के वचन का श्रवण करके मुनि श्रेष्ठ बोले। मुनि ने कहा-आप दोनों उस चन्द्रशेखर भूपति के पुत्र नहीं हैं। आप तो तारावती के उदर से समुत्पन्न हुए शंकर के ही पुत्र हैं। आप दोनों महावीर्य सद्योजात हैं और वेतालत्व में समस्त हैं। आप भृंगी और महाकाल नाम वाले हैं। शाप के कारण से ही आप दोनों इस धरणीतल में समागत हुए हैं। तुम दोनों को यहाँ पर उसी कारण से वह प्रिय दान नहीं देना चाहता है। आप अपने पिता वृषभध्वज भगवान् शंकर की शरण में गमन कीजिए। वे ही शम्भु तुम दोनों को भी कुछ देंगे। इस उग्रतप से क्या लाभ है जिसका फल बहुत ही लम्बे समय में प्राप्त होता है। परम आत्मा को धारण करने वाले मुनि शार्दूल कपोत इतना कहकर जिनको अतीत वर्तमान और भविष्य का पूर्ण ज्ञान था, उन दोनों से उन सबने कहा था। जिस प्रकार से भृंगी और महाकाल को शाप प्राप्त हुआ था और वे धरणी पर समागत हुए थे। हे नृप! जैसे भगवान् शम्भु और गौरी पृथिवी पर आगत हुए थे। पहले उस मुनि के द्वारा तारावती को शाप