कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 291, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें൵श्रीकालिका पुराण ൵ २९३ ꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸꣸ उनकी किस प्रकार से आराधना करेंगे, यह भली भाँति बताइए। श्री भगवान ने कहा- हे सुतो! मैं महामाया का मन्त्र और कल्प आप दोनों के उपदेश करूँगा और तात्त्विक रूप से बता दूँगा जिससे यह सब हो जायेगा। और्व ने कहा- हे नृपोत्तम! उन देवेश्वर ने इस प्रकार कहकर फिर माया का ध्यान-मन्त्र और विधि गिरीश प्रभु ने उन दोनों को भली भाँति कह दिए थे। उस भैरव ने अठारह पटलों के द्वारा शिवामृत में निर्णय विधि कल्प के निबन्ध की रचना की थी सगर ने कहा- पहले शम्भु ने उन दोनों को कैसा मन्त्र बोला था जिसके द्वारा आराधना करके वे दोनों गाणपत्य पद को प्राप्त हुए थे। जो अठारह पटलों के द्वारा उन भैरव ने निबद्ध किया था उसे कल्प और रहस्य के साथ श्रवण करने का उत्साह कर रहा हूँ। और्व ने कहा- उसके बहुत होने से बहुत काल में ही कहा जा सकता है। इस कारण से जो भी महादेवजी ने कहा था उसको सद्यः उद्धृत करके उसका तत्व संक्षेप में कहता हूँ ! हे नृपोत्तम! उसका श्रवण कीजिए। उस अवसर पर पार्वती के मन्त्र को पूछते हुए उन बेताल-भैरव को महादेवजी ने बोला था, उस मन्त्र और कल्प को सुनिए। श्री भगवान् ने कहा- आप श्रवण कीजिए में गुह्य से भी परम गोपनीय को बतलाऊँगा। वैष्णवजी का महामाया महोत्सव आठ अक्षरों वाला है। इस श्री वैष्णवजी के मन्त्र का नारद ऋषि है और शम्भु देवता है। इसका अनुष्टुप् छन्द है और इसका सब अर्थों के साधन में विनियोग होता है। हानान्त पूर्व और णान्त उसी भाँति नान्त और णान्त हैं। एकादशाष्टक आदि बाल छटवाँ णान्त है जिसमें विष्णु आगे हैं। इन आठ अक्षरों से मन्त्र होता है जो शोणपत्र की प्रभा के समान होता है। ॐकार पूर्व में लगाकर समस्त प्रभा साधना करने वालों के द्वारा जप करना चाहिए। यह महामन्त्र परम गोपनीय है और वैष्णवी मन्त्र की संज्ञा वाला है। मन्त्र वाले वरगत हैं इसी कारण से अंग कीर्तित किया गया है। महादेवजी का ऊर्ध्व मुख है। यह बीज कहा गया है। ॐकार