कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३०८ ௵ श्रीकालिका पुराण ௵ जननी कूष्माण्डी मेरे नैर्ऋत्य में मेरी रक्षा करें। पश्चिम दिशा में स्कन्द माता मेरी सदा ही रक्षा करें। वायव्य दिशा में मेरी कात्यायनी रक्षा करे जो सदा ही रक्षा करे। तथा ऐशानी दिशा में निरन्तर पावनी मेरी रक्षा करे, जो सदा लोकेश्वरी है। कालरात्रि कौवेरी दिशा में स्वयं सदा मेरी रक्षा करे तथा ऐशानी दिशा में निरन्तर पावनी मेरी रक्षा करे। मेरे दोनों नेत्रों की भगवान् वासुदेव रक्षा करें जो नित्य ही सनातन प्रभु हैं। बदन में मेरी ब्रह्मा रक्षा करें जो पद्मयोनि और अयोनिज हैं अर्थात् किसी योनि से उत्पन्न नहीं होकर केवल पद्म से ही समुत्पन्न हुए हैं। मेरे नासिका के भाग में मेरी सर्वदा चन्द्रशेखर प्रभु रक्षा करें। भगवान् शम्भु के पुत्र गजवक्त्र (गणेश) मेरे दोनों स्तनों की नित्य रक्षा करें। मेरे बाँये और दाहिने हाथों की नित्य दिवाकर रक्षा करें। परमेश्वरी महामाया स्वयं मेरी नाभि में रक्षा करें। महालक्ष्मी गुह्य की रक्षा करे, तन्तुओं की रक्षा सरस्वती करे। शुभा महामाया पूर्व भाग में मेरी नित्य ही रक्षा करें। वरानिनी अग्निज्वाला आग्नेयी दिशा में नित्य ही रक्षा करे। रुद्राणी मेरी याम्य दिशा में रक्षा करे और चण्ड नासिका नैर्ऋत्य में रक्षा करे। महेश्वरी उग्रचण्डा पश्चिम में नित्य ही रक्षा करें। वायव्य में प्रचण्डा और कौबेरी दिशा में घोररूपिणी रक्षा करे। ऐशानी दिशा में ईश्वरी सनातनी नित्य ही मेरी रक्षा करे। महामाया ऊपर की और नीचे की ओर परमेश्वरी रक्षा करे। उग्रा मेरी आगे की ओर रक्षा करे तथा पृष्ठभाग में वैष्णवी रक्षा करे। दक्षिण पार्श्व में ब्रह्माणी शोभना नित्य मेरी रक्षा करे। वृषभध्वजा माहेश्वरी वाम में पार्श्व में, ब्राह्मणी शोभना नित्य मेरी रक्षा करे। पर्वत में कौमारी और जल में वाराही मेरी रक्षा करे। दाढ़ वालों के भय में नारसिंहीं रक्षा करे, आकाश में इन्द्री तथा सर्वत्र जल में और स्थल से मेरी रक्षा करें। समस्त अंगुलियों की रक्षा सेतु करे तथा देवादि कर्णों की रक्षा करें। देवान्त चिबुक में रक्षा करे और दोनों पार्श्वों में शक्ति पञ्चम रक्षा करें। उसी भाँति ही मेरे ऊरुओं की रक्षा करे और माया मेरी दोनों जाँघों की रक्षा करे 'यः' सर्वदा