कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंश्रीकालिका पुराण ३०९ समस्त इन्द्रियों की और रोमों के कूपों की रक्षा करे । मेरी त्वचा में मुझको सर्वदा भगवान् शम्भु रक्षा करें । नाखून, दाँत, कर और ओष्ठ आदि में सदैव ही 'राँ' मेरी रक्षा करे । मेरी बस्ती में देवादि रक्षा करे और स्तनों तथा कुक्षों में देवांत मेरी रक्षा करे । 'यः' सेतु एतदादि में और दे के बाह्य भाग में मेरी रक्षा करें । आज्ञाचक्र में तथा ललाटकारा में वैष्णवी तन्त्र-मन्त्र मेरी नित्य ही रक्षा करती हुई स्थित रहे । समस्त कानों की नाड़ियों में और पार्श्व कक्ष शिखाओं में, रुधिर, स्नायु, मज्जाओं में, मस्तिष्कों में और पार्वों में द्वितीयाष्टक्षर मन्त्र कवच सभी ओर रक्षा करें । रेतस (वीर्य), वायु में, नाभि के रन्ध्र में, पृष्ठ सन्धियों में सभी और षडक्षर यह तीसरा मन्त्र सर्वदा मेरी रक्षा करे । नासारन्ध्र में महामाया और कण्ठरन्ध्र में वैष्णवी रक्षा करे तथा समस्त संधियों में दुर्गार्ति हारिणी दुर्गा मेरी रक्षा करे । श्रोतों में 'हूँ फट्' यह कालिका संधियों में दुर्गार्ति हारिणी दुर्गा मेरी रक्षा करे । श्रोतों में 'हूँ फट्' यह कालिका नित्य रक्षा करे । नेत्र में नेत्र त्रय बीज रक्षा करने के लिए सदा स्थित रहें । ॐ ऐं ह्रीं हैं नासिका में रक्षा करती हुई चंडिका रहे । ॐ ह्रीं हूँ तारा सदा मेरे जिह्वा मूल में स्थित रहे । मेरे हृदय में उत्तम ज्ञान की रक्षा करने के लिए सेतु स्थित रहें । ॐ क्षौं फट् महामाया सभी और मेरी रक्षा करें । ॐ युँ सः प्राणान् कौशिकी मेरे प्राणों की रक्षा करें । ह्रीं ह्रीं सौं भर्ग की दयिता देह शून्यों में मेरी रक्षा करें । ॐ नमः शैलपुत्री सदा सब रोगों का प्रमार्जन करे । ॐ ह्रीं सः हस्रें सः अस्त्राय फट् शिवदूती सिंह, व्याघ्र के भय से और रण से नित्य रक्षा करे । ह्रीं सब अस्त्रों से स्थित रहे । ॐ हां ह्रीं सः चन्द्रघण्टा कर्णों के छिद्रों में मेरी रक्षा करें । ॐ क्रीं सः कामेश्वरी कामों में अभिस्थिति होवें और रक्षा करें । ॐ आं हूँ फट् प्रचण्डा शत्रुओं को और विघ्नों को विमर्दित करे । ॐ अं शूल से वैष्णवी जगदीश्वरी नित्य ही रक्षा करे । ॐ वं ब्रह्माणी चक्र से रक्षा करे और रुद्राणी शक्ति से रक्षा करे । ॐ टं कौमारी वज्र से