भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 442 में से

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पृष्ठ 310

൵७५ श्रीकालिका पुराण ൵७५ ३१३ ꩜꩜*꩜ मन्त्र साधना के अंग मार्कण्डेय महर्षि ने कहा-भैरव के द्वारा इस सम्वाद को राजा सगर ने श्रवण करके और भर्ग से वेताल के द्वारा भी सुनकर पुनः और्व से पूछा । सगर ने कहा-हे द्विज! आपने मन्त्र अंगों के सहित बतला दिया है । हे द्विजोत्तम! अब देवी के अंगमन्त्र मुझसे कहिए । तथा समस्त्र मन्त्र और सभी ओर पूजा के स्थान हैं । ठीक उसी भाँति उत्तर मन्त्र और पृथक्-पृथक् कवचों को और कामाख्यान के माहात्म्य को जो रहस्य और मन्त्रों के सहित होवे । जैसा भगवान् उमापति महादेव ने कहा था और वेताल, भैरव दोनों को बतलाया था उसे विस्तार सहित आप कहने की कृपा करें । यह महान् अद्भुत है, इसका श्रवण करते हुए मुझे तृप्ति नहीं होती है । जबकि आपको इसे कहते हुए मैं देखता हूँ तो मुझे बहुत ही अधिक कौतूहल होता है । और्व ने कहा-हे राज शार्दूल! जो भी उमापति ने अपने पुत्रों से कहा था और जो एक महान् आख्यान है । मैं अब आपको कहता हूँ मुझसे आप श्रवण कीजिए । यह परमाधिक रहस्य है, बहुत ही पवित्र है और पापों का नाश करने वाला है । पुरुषों का परम स्वस्त्ययन अर्थात् कल्याण का आलय है और इसको गर्भ में पुसंवन कहा गया है, यह कल्याण करने वाला, परम भद्र और चारों वर्गों के फल का प्रदान करने वाला हैं । इसको ऐसे व्यक्ति को भी भूलकर भी नहीं देना चाहिए जो शठ होवे, चंचल चित्त वाला हो । जो नास्तिक हो, जो अजित आत्मा वाला हो, जो देव, द्विज और गुरु वर्ग का मिथ्या निर्बन्धकारी होवे । जो पापी हो तथा अभिशाप्त हो, खञ्ज हो, काणा हो और रोगी हो ऐसे पुरुष से यह नहीं करना चाहिए और न देना भी चाहिए । जिसमें श्रद्धा का अभाव हो उसे भी यह न देवे । उमापति ने उन दोनों को वेताल, भैरव से कहकर अर्थात् इस महामाया के मन्त्र कल्प का उपदेश देकर पुनः यह बोले थे । भगवान् ने कहा- उत्तम मन्त्र तो मैंने कह दिया है किन्तु अब मूल मन्त्र को बताऊँगा वह ही सर्वप्रथम जान लो । यह सब पूजाओं में संगत हैं ।