भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 330, कुल 442 में से

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३३४ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ तिथि दुर्गा देवी की है । मातृगणों की नवमी तिथि कही है तथा दशमी तिथि वासुकि की होती है । एकादशी ऋषियों की है और द्वादशी भगवान् चक्रपाणि की होती है । त्रयोदशी कामदेव की है और मेरी चतुर्दशी तिथि है ① ब्रह्मा और दिक्पालों की पौर्णमासी तिथि मानी गयी है । जो पुरुष देवों को पवित्राओं का आरोपण नहीं करता है उसकी साम्वत्सरी पूजा के फल को भगवान् केशव हरण कर लिया करते हैं । इसीलिए प्रयत्नपूर्वक पवित्रारोपण अवश्य करना चाहिए । ऐसा करने पर बहुत फल की प्राप्ति होती है । पवित्रा जिस सूत्र से और जैसे भी करना चाहिए उसका ज्ञान होना चाहिए तभी उसे पवित्रारोपण करना चाहिए । हे भैरव! सर्वप्रथम तो दर्भ सूत्र है उससे पर पद्म सूत्र होता है । इसके पश्चात् क्षेम सुपुण्य होता है और इससे पर कपास का सूत्र हुआ करता है । यत्नपूर्वक पवित्रा विचित्र करने चाहिए । अर्थात् कई रंगों से समन्वित होने चाहिए । गन्धमाल्य सुरभियों से जैसा कहा गया है विरचित होने चाहिए । उस सूत को कन्या कर ले अथवा पवित्रता प्रमदा उसको करले । जो विधवा हो और साधुशीला हो वह उसको करले किन्तु दुःशील या दुःख शील कभी भी इसको न करे । इस पवित्रा की रचना में ऐसे सूत्र का वर्णन कर देवे जो सुई से भिन्न हो, दग्ध हो, भस्म और धूप से अविगुण्ठित हो । जिसका उपयोग किया गया हो, जो चूहों के द्वारा कुतरा हुआ हो, मद्य एवं रक्त से दूषित हो, मलिन, नील रक्त हो, ऐसे सूत्र का यत्नपूर्वक परिवर्जन कर देना चाहिए । सूत्रों से कनिष्ठ, मध्यम और उत्तम पवित्रा की रचना करे । कनिष्ठ जो पवित्रा है वह सत्ताईस तन्तुओं का होता है । यह पवित्रा मर्त्यलोक में यश, कीर्ति, सुख और सौभाग्य का बढ़ाने वाला होता है । चौवन तन्तुओं का पवित्रा मध्यम कहा गया है । परम दिव्य भोगों का आवाहन करने वाला पुण्य, स्वर्ग और मोक्ष का प्रदान करने वाला उत्तम होता है जो एक सौ आठ तन्तुओं के द्वारा निर्मित होता है उसको महादेवी के लिए अर्पित करके मनुष्य भगवान् शिव के सायुज्य

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