भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 329, कुल 442 में से

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पृष्ठ 329

वह मनुष्य पुत्रों और प्रपौत्रों से समृद्ध और धन-धान्य समृद्धियों से समन्वित होता है और वह दीर्घ आयु वाला, सर्व प्रकार के सुभग इस लोक में होता है । शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि में चैत्र मास में उस समय में होने वाले पुष्पों से और अशोकों से भी जो पुरुष इस मन्त्र के द्वारा पूजन किया करता है उसे कभी शोक नहीं होता है अथवा कोई रोग भी नहीं होता है और न दुर्गत ही होती है । ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनुष्य भली भाँति उपवास करे और नवमी तिथि में तिलों सहित अन्नों, यावकों, मोदकों से, क्षीर, घृत-शहद, शर्करा के सहित पिष्टक से, अनेक पशुओं के रुधिर से और माँसों से पूजन करे । इसके अनन्तर शुक्ल पक्ष की दशमी में तिलों से मिश्रित जल से दुर्गा मन्त्र के द्वारा तीन अंजलियाँ देनी चाहिए । इस रीति से करने पर दशमी तिथि में दस जन्मों में भी जो पाप किया है वह प्रलीन हो जाता है और ऐसा करने वाला पुरुष दीर्घायु भी हो जाता है । आषाढ़ मास के शुक्ल की दशमी में तिलों से मिश्रित जल से दुर्गा मन्त्र के द्वारा तीन अंजलियाँ देनी चाहिए । इस रीति से करने पर दशमी तिथि में दस जन्मों में भी जो पाप किया है वह प्रलीन हो जाता है और करने वाला पुरुष दीर्घायु भी हो जाता है । आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की जो अष्टमी है और श्रावण मास की अष्टमी है उसमें पवित्रा धारण करावे । पवित्राओं का आरोपण देवी का परमाधिक प्रीति करने वाला होता है । हे भैरव! दुर्गा तन्त्र से मन्त्र के द्वारा और दुर्गा बीज से, हे भैरव! पवित्रारोपण का समाचरण करे । विशेष रूप से श्रवण को प्राप्त करके देवी को पवित्रारोपण करना चाहिए । समस्त देवों का पवित्रारोपण करना चाहिए । आषाढ़ में अथवा श्रावण में सम्वत्सर के फल का प्रदायक होता है । द्वितीया तो देवी के श्री की है जो अन्य सब तिथियों में उत्तम है, ऐसा कहा गया है । तृतीया तिथि भवभामिनी की है और चतुर्थी उसके सुत की है, पंचमी सोमराज की है और षष्ठी गुही की बतायी गयी है । सप्तमी भुवन भास्कर की कही गई है तथा अष्टमी