कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 332, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें൘९ श्रीकालिका पुराण ൘९ ३३५ की प्राप्ति किया करता है। यदि भगवान् वासुदेव के लिए उत्तम पवित्रा को समर्पित करे तो वेदपुरुष सीधा हरि के लोक में गमन किया करता है, इसमें लेशमात्र भी संशय नहीं है। महादेवी को अर्पित पवित्रा तो भुक्ति और मुक्ति के प्रदान करने वाला होता है। जो पुरुष रत्न माला में महादेवी की सेवा में पवित्रा का समर्पण किया करता है वह सहस्त्र करोड़ कल्पों तक स्वर्ग में निवास करके शिव ही हो जाया करता है। यह तो नागहार नाम वाला भगवान् शंकर का पवित्रा होता है। एक सहस्त्र आठ तन्तुओं के द्वारा परम मनोहर पवित्रा बनाकर जो मेरे लिए अर्पित किया करता है वह उसमें जितने ही तन्तुओं का संचय होता है उतने ही सहस्त्र कल्पों तक मेरे ही लोक में आनन्द का उपभोग किया करता है। एक हजार आठ से भगवान् हरि की वनमाला कही गई है। उनके तन्तुओं के दान से भगवान् विष्णु के सायुज्य की प्राप्ति होती है। जो कनिष्ठ पवित्रा होता है वह कल्पपर्यन्त रहने वाला होता है। बारह ग्रन्थियों से समन्वित आत्ममान के द्वारा उसे योजित करे। ऊरुओं तक आने वाला मध्यम पवित्रा होता है। वहाँ पर ग्रन्थियों को योजित कर लेना चाहिए। इसका चौबीस का मान आत्मा का है वह उत्तम कोटि का पवित्रा होता है। हे भैरव! वह जन्तु पर्यन्त कहा गया है। अपने मान से छत्तीस ग्रन्थियों को योजित करे। एक सौ आठ ग्रन्थियों का सुविधान से करना चाहिए। नागहार नामक जो है उसी के समान अन्यों में विद्यमान से पवित्र किया जाता है। जिस सूत्र के द्वारा पुनः ग्रन्थियाँ होती हैं, उससे अन्यय वर्ग वाले सूत्र से लक्षण से समन्वित पवित्रा की रचना करनी चाहिए। कनिष्ठ में सात वेष्ठनों के द्वारा ग्रन्थि करे। मध्यम में दुगनी करे और उत्तम में तिगुनी करे। पूर्व दिन में पवित्रताओं का अधिवासन करना चाहिए। फिर वहाँ दूसरे दिन में मन्त्रा में मन्त्र करे। दुर्गा बीज मन्त्र लोक वैष्णवी तन्त्र के द्वारा करे। विचक्षण पुरुष को प्रत्येक ग्रन्थि में स्वयं मन्त्र का न्यास करना चाहिए। हे भैरव! यहाँ पर जितनी भी ग्रन्थियाँ हों उतनी ही भाँति न्यास करे।