कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३३६ ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ उसके मन्त्र उससे अंगोपयोजन होवें। दुर्गा तन्त्र के मन्त्र के द्वारा सत्त्व न्यास करना चाहिए। एक स्थान में यज्ञपात्र में समस्त पवित्राओं को रखकर उसमें गन्ध आदि और पुष्पों को रखकर परम शोभन, हे भैरव! अँगुली के अग्रभाग से फिर तत्त्व न्यास करावे। द्विज का मन्त्र न्यास 'इन्द्रविष्णुः' यह कहा गया है। शूद्रों के मन्त्र से मेरा तत्व न्यास कहा गया है। इसके द्वारा इसके मन्त्र और इससे ही दान करावे। कुंकुम, उशीर, कर्पूर और चंदन आदि विलेपनों से पवित्रताओं का विलेपन करके तत्व न्यास को योजित करना चाहिए। मनुष्य विधिपूर्वक मण्डल में देवी का अभ्यर्चन करे। दुर्गा बीज द्वारा देवी के मस्तक में पवित्रा का समर्पण करना चाहिए। जिस देव का जो कहा है उसका उसी से ही मण्डल होता है। जिस-जिसका जो मन्त्र है जैसा भी ध्यान आदि पूजन है वह उसी मन्त्र से ही यत्नपूर्वक पूजन करके उसके ही बीज और मन्त्र से मस्तक में पवित्रा का अर्पण करे। जो भी मुझको पवित्रा का समर्पण करता है और दोनों देवों के लिए देता है। हे भैरव! सभी देवों का सम्पूर्ण अर्थ होता है। अग्नि, ब्रह्माभवानी, गज वक्त्र, महोरग, स्कन्द, भानु, मातृगण, दिक्पाल, नवग्रह, इन सबको घटों में यथाविधि, प्रत्येक का पूजन करके परम सावधान होते हुए इनके लिए एक-एक पवित्रा मस्तक में समर्पित करे। पञ्चगव्य चरु को बना करके देवी के लिए तीन आहुतियाँ देवे। उसी से भगवान् विष्णु और शम्भू के लिए यथाविधि देवे। आज्य (घृत) तथा तिल संयुत घृत से अष्टोत्तर शत आहुतियाँ देनी चाहिए। साधन करने वाले को महादेवी के लिए एक सौ आठ आहुतियाँ देनी चाहिए। इसी विधान से भगवान् विष्णु आदि को भी साधक द्वारा आहुतियाँ देनी चाहिए। धर्म, काम और अर्थ की सिद्धि के लिए पवित्रारोपण करना चाहिए। यह एक परमावश्यक कृत्य है। अनेक प्रकार के नैवेद्य पेय पिष्टक मोदकों से, कूष्माण्ड, नारिकेल, खजूर, आम्र, दाड़िम, कर्क, रुद्राक्ष आदि विविध भाँति के फलों के द्वारा,