भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 368, कुल 442 में से

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पृष्ठ 368

௵ श्रीकालिका पुराण ௵ ३७१ करे । सातवें दिन में बताए हुए देवताओं की उत्तम बलि करे । सातवें दिन में तोरण के अन्तर में सेवन करते हुए का पूजन करना चाहिए । महाबाहुओं वाले दो भुजाओं से युक्त कवच में उज्जवल जाज्वल्यमान सूर्यपुत्र का पूजन करे । शुक्ल वस्त्र से केशों को उद्ग्रस्थित करके कुशा को बाँये हाथ में लिए दक्षिण कर को खंड के सहित सित सैन्ध पर संस्थित नाम में न्यस्त करे । इस प्रकार के रेवन्त को प्रतिमा में अथवा घट में तोरण के अन्तर में सूर्यदेव की पूजा के विधान से पूजन करे । रेवन्त अश्व को अथवा गज को पूजित करना चाहिए । अहत अम्बर ( वस्त्र ) से संजीव, माला और चन्दन से संयुत सुवर्ण से विद्ध निस्त्रिश वाला, विचित्र, कवच आदि से युक्त, ऐशानी दिशा में होमकुण्ड की वेदिका पर जो पूर्व में हुई हैं अश्व और गज के पालक पृथक्-पृथक् ले जावें । अश्व और गज के ले जाने पर राजा पूर्व में कथित निमित्त को यत्न के साथ देखे और फल का भी अवधारण करे । होम कुण्ड की उत्तर दिशा में बाघम्बर चर्म पर स्थित होकर वेदों के ज्ञाता और अश्वों के ज्ञान रखने वाले के सहित सैन्धव ( अश्व ) को देखकर लाये हुए अश्व के लिए शीघ्र ही सुगन्धित भात की पिण्डी देवे । पुरोहित वहाँ पर शान्ति मन्त्रों के द्वारा अभिमन्त्रित करके ही उसे देवे । पुरोहित लाये हुए अश्व के लिए शीघ्र ही सुगन्धित भात की पिण्डी देवे । पुरोहित वहाँ पर शान्ति मन्त्रों के द्वारा अभिमन्त्रित करके ही उसे देवे । वह अश्व यति उसका अवघ्राण करे अथवा अशन करे तो उस अवसर पर सब प्रकार का कल्याण होता है । और इसके विपरीत होवे तो अन्यथा हुआ करता है । उदुम्बर की शाखा आम्र की शाखा कुशा के साथ घट के जल में आप्लावित करके अश्वों का, हाथियों का, राजा का और सैनिकों का अथवा रथों का स्पर्श करे । पुरोहित शान्तिक और पौष्टिक मन्त्रों के द्वारा विप्रों के सहित चतुरंग का सेवन करे । दिक्पालों और ग्रहों का वैष्णव मन्त्रों द्वारा बहुत प्रकार से अभिसिञ्चन करके ऋत्विक् सुवर्ण के दर्पण की, नृप को फिर मन्त्री