कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 369, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें३७२ श्रीकालिका पुराण को, राजपुत्र को तथा अन्य आमात्यों को और सैनिकों को दिखा करके शिव शार्दूल कम्पन करते हुए सबको दिखावे । मिट्टी से शत्रु से हृदय में शूल से वेध करे और शिर का खंड से छेदन करना चाहिए । आचार्य पीछे कवि को अभिमंत्रित करके फिर प्रभाकर ऐन्द्र मन्त्रों से स्वयं के लिए मुख में देवे । उस समय में इस मन्त्र से नृप पर उस समारूढ़ होकर अपने सम्पूर्ण बलों के सहित उत्तर पूर्व दिशा में गमन करे । उस समय में ऋत्विक, पुरोहित, आचार्य सब ही नृप के पीछे अनुगमन करें और अन्य निमित्तों का विलोकन करें । राजा तुमुल वाद्यों की ध्वनियों से मेदिनी को मानों विदीर्ण करता हुआ नीराजन में गमन करे । विविध मणि विद्रुम, मुक्ता आदि स्वर्ण रत्नों से सुभूषित होकर केवल एक कोस गमन करके राजा पूर्व के द्वार से अपने पुर में प्रवेश करे और पुरोहित विप्रों के साथ यज्ञ में गमन करे । वहाँ जाकर पीछे द्विजों के लिए दक्षिणा सुवर्ण, गौ, तिल आदि शक्ति से दान देवे । इस प्रकार से बलों का और राजाओं का नीराजन करके इस लोक में और मृत्युगत होकर भी राजा सुस्थिर लक्ष्मी की प्राप्ति किया करता है । हे अश्व! आपका उद्भव सागर से हुआ है आप अश्वामृत से सज्जात हैं । शिव सत्त्व से इन्द्र का वहन किया करते हैं, उसी से मेरा वहन करें । जिस सत्य से रेवन्त का, जिस सत्य से भास्कर का वहन करते हो उसी सत्य से विजय प्राप्त करने के लिए मेरा वहन करो । इन मूल मन्त्रों के द्वारा अश्व पर आरोहण का समाचरण करना चाहिए । महिषी के आगे समारोहण करके फिर शुद्धान्तः पुर लम्बित करे । फिर वह महिषी ( पट्टाभिषक्ता रानी ) को पलंग पर संस्थित राजा का सिद्धार्थ के सहित दूर्वा क्षतों से स्त्रियों के साथ अभ्यर्चन करना चाहिए । यह तृतीया में नीराजन में भूमि के ग्रहण करने पर ही करे । हे राजन्! यह मैंने आपके सामने नीराजन का क्रम बता दिया है । अब स्नान का विधान आप मुझसे श्रवण कीजिए ।