भारतकोश
कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)

Kalika Purana with Hindi Translation

महर्षि व्यास द्वारा

स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

पृष्ठ 376, कुल 442 में से

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पृष्ठ 376

[header] h ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ ३७९ [/header]

रत्नों से समन्वित पादपीठ पर राजा अपने चरणों को समारोपित करके उस पर्यंक के पीठ पर स्थित चर्म खंड चतुष्टय में रत्नों से शोभित अनेक अलंकारों से युक्त नृपति का स्नपन करावे । ब्राह्मणों के साथ सुख से संगत राजा को जो सम्वीन काम्बल वाला कृष्ण और बहुत से वस्त्रों से शोभित हो उसको कलशों के द्वारा बलि पुष्पादि से और शालिं चूर्णों से स्नान करावे । आठ, सोलह, बीस, एक सौ आठ अथवा अधिक कलशों की संख्या बतायी गयी है । उस संख्या से उत्तरोत्तर अधिक भी होती है । जय और कल्याणप्रद मंत्रों से कौर मातृकों से आज्य को तेज समुद्दिष्ट किया है । आज्य पापों के हरण करने वाला है । आज्य ही सुरागणों का आहार और आज्य में लोक प्रतिष्ठित है । भूमिगत, अन्तरिक्षस्थ, अथवा दिव्य अर्थात् दिवलोकगत जो भी आपको कल्मष आ गया है वह सब आज्य के संस्पर्श से विनाश को प्राप्त होवे । इसके अनन्तर शरीर से कम्बल और वस्त्र को अलग करके पुष्पों और स्नानीयों से पूरित कलशों के द्वारा भूप को स्नान करावे । हे नृप श्रेष्ठ! शरीर के तत्त्वार्थ के साधक इन मन्त्रों से राजा को स्नान करावे । सुरगण आपका अभिषिञ्चन करे और जो सिद्ध एवं पुरातन हैं, ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, साध्य, मरुद्गण, आदित्य, सुगण, भिषग्वर, दोनों अश्विनी कुमार, देवमाता अदिति, स्वाहा, लक्ष्मी, सरस्वती, कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, कुहू, दिति, सुरमा, विनिता, कद्रु, जो देव पत्नियां कही गयी हैं वे और देव मातायें सिद्ध और अप्सराओं के गण सब आपका अभिषिञ्चन करें । नक्षत्र, मुहूर्त्त, पक्ष, अहोरात्र, सन्धि, सम्वत्सर, निमेष, कला, काष्ठा, क्षण, लव ये काल के सब अवयव आपका अभिषिञ्चन करे और जो सिद्ध एवं पुरातन हैं, ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, साध्य, मरुद्गण, आदित्य, सुगण, भिषग्वर, दोनों अश्विनी कुमार, देवमाता अदिति, स्वाहा, लक्ष्मी, सरस्वती, कीर्ति, लक्ष्मी, धृति, कुहू, दिति, सुरमा, विनिता, कद्रु, जो देव पत्नियां कही गयी हैं वे और देव मातायें सिद्ध और अप्सराओं के गण सब आपका अभिषिञ्चन करें । वैमानिक अर्थात् विमानों पर

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