कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
पृष्ठ 377, कुल 442 में से
संदर्भ में पढ़ें३८० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ संस्थित रहने वाले सुरों के समुदाय, सागरों के सहित मनुगण सरिताएँ, महानाग, नाग, किम्पुरुष, वैखानस, महाभाग द्विज और अपनी दाराओं के साथ सप्तर्षि गण जो ध्रुव के स्थान वाले हैं, मारीच, अत्रि, पुलह, पुलस्त्य, क्रतु, अंगिरा, भृगु, सनत्कुमार, सनक सनन्दन, दक्ष, जेगीषव्य, अभिनन्दन । एक, दो और तीन, जाबालि, कश्यप, दुर्वासा, दुर्विनीत कण्ड, कात्यायन, मार्कण्डेय, दीर्घतमा, शनुःशेप, विदूरथ, और्व, सवर्त्तक, च्यवन, अत्रि, पराशर, द्वैपायन, यव, क्रीति, देवरात, सहात्मज, ये और अन्य जो भी देव व्रत में परायण हैं वे अपने शिष्यों के सहित और अपनी दाराओं के साथ तप के ही धन वाले आपका अभिषिञ्चन करें । पर्वत, वृक्ष, नदियाँ और परम, पुण्य आयतन, प्रजापति, क्षिति, गौयें, विश्व की मातायें, दिव्य वाहन, सब लोक, चर और अचर, अग्नियाँ, पितर, तारा, जहमूत, आकाश, दिशायें, जल, ये और अन्य बहुत से पुण्य संकीर्तन वाले तथा शुभ सब उत्पातों के नियर्हण करने वाले जलों के द्वारा आपका अभिषिञ्चन करें । इस प्रकार से इन शुभ प्रदाता दिव्य मन्त्रों के द्वारा दूसरों के द्वारा अभिषेक करे । निम्नलिखित मन्त्रों से व नारायणों से, रौद्रों से, ब्रह्मा और इन्द्र से, समुद्भवों से, 'आपोहिष्ठा' इत्यादि से, 'हिरण्य' इससे, 'सम्भव' इससे, सुर, इससे 'मानस्तोके' इस मन्त्र से और 'गन्ध द्वार', इस मन्त्र के द्वारा, सर्वमंगल मांगल्ये इससे, 'श्रीश्चते', इसके द्वारा और ग्रह योगियों से इस प्रकार से स्नान का समादन करके कम्बलों से शरीर को आवृत करके 'सर्व मंगल' इत्यादि मन्त्र के द्वारा कपास से निर्मित वस्त्र को धारण करना चाहिए । इसके उपरान्त आचमन करके देवों का, गुरु का और विप्रगणों का अभ्यर्चन करना चाहिए । फिर ध्वज, छत्र, चामर, घण्टा, अश्व, गज को मन्त्र का जप करके धारण करे और इसके अनन्तर हुताशन के समीप गमन करना चाहिए । वहाँ पर जाकर राजा वह्नि के मध्य में वह्नि की श्री का निरीक्षण करें । वहाँ पर बिन्दुओं के द्वारा निमित्तों की और अनिमित्तों को लक्षित करना