कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंवृद्धि के लिए संस्कार की हुई अग्नि में हवन करना चाहिए । कामना की वृद्धि के लिए संख्या से जो जप संकल्प किया गया है उसके अन्त में पूजन किया है वह द्विजों के द्वारा करना चाहिए । श्रेष्ठ द्विजों ने जिसको पुरश्चरण के नाम से कीर्तित किया हैं उसमें पूर्व में पुराण पूर्वोक्त और विस्तार से वर्णित विधानों के द्वारा कामाख्या और वैष्णवी देवी का पूजन करे । जहाँ तक भी सम्भव हो साधक को यहाँ पर सोलह उपचार समर्पित करने ही चाहिए । उसी भाँति षोडश पूर्वोक्त उपचारों का और विधान के कृत्यों का लंघन नहीं करना चाहिए । सम्पूर्ण पूजन करके कल्पोक्त का सौ बार जप करे । जाप के अन्त में अग्नि में होम करे और होम के अन्त में तीन बलि दे । तीन जाति के बलियों का वितरण करे तथा इसके उपरान्त नृत्य गीत करना चाहिए । पत्नी स्वयं अथवा भाई या गुरु, अपना पुत्र अथवा शिष्य नैवेद्य आदि का विनियोजन करना चाहिए । यज्ञ की समाप्ति पर श्री गुरुदेव को शुभ दक्षिणा देनी चाहिए । सुवर्ण, तिल, गौएं दक्षिणा में देवे और इनके देने की शक्ति न हो तो केवल चेटक ही निवेदित करे । मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि में ब्रह्मचर्य रखने वाला तथा इन्द्रियों को जीत लेने वाला रहे और नवमी में अथवा चतुर्दशी में महादेवी का पुरश्चरण करे । हे भैरव ! श्री गुरुदेव के मुख से आदान करना करना चाहिए । जो भी विधि और विस्तार कल्प में कहा गया हो उससे इन उक्त तिथियों में भली भाँति पूजन करे । सम्पूर्ण पूजा को न करके ईप्सित मन्त्र को नहीं देना चाहिए अथवा पुरश्चरण भी नहीं करे । यदि ऐसा करता है तो अवसाद प्राप्त किया करता है । जो नित्य पूजा है, यदि की जा सकती है तो सम्पूर्ण पूजा करे और उस समय में अतीन्द्रिय होकर की कल्प में वर्णित पूजन करना चाहिए । हे भैरव! यदि विस्तार से देवी की पूजा करना न हो तो कल्प में कथित अन्य देव की पूजा करे । अर्घ्य पात्र में आठ बार जप कर उपचारों का प्रसेचन करना चाहिए । आधार शक्ति के प्रमुख मूल वर्गों का प्रयोग करे और हृदय