कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंसमय या स्थान में हों ऐसा भी नहीं जाने जाते हैं। हे देव! आप तो देवों के भी देव हैं। मेरे इस महान् संशय का छेदन कीजिए। इस माया में कहाँ पर स्थित हैं, किस कारण से स्थित हो रहे हैं और ऐसे किस प्रकार से वे अवस्थित हो रहे हैं। हे प्रभो! मैं अब आपके ही उपदेश से उन सबके पीछे अनुगमन करूँगा। यदि आपके हृदय में दया हो तो अब उन सबकी स्थित के विषय में मुझे बताइये। महादेवजी ने देवगुरु के उन वचनों का श्रवण किया था और उनके उपदेश का भी ज्ञान प्राप्त कर लिया था। फिर महादेव ने कहा था जो कि कर्म हुआ था और जिस प्रकार से वे सब माया में बद्ध हुए थे, यह सभी कुछ बता दिया था। महामाया महादेवी को भी अब ज्ञात करा दिया था इसी कारण से उस देवी की माया में बद्ध हुए भगवान् विष्णु सागर के जल में स्थित हैं। उसकी खोज करते हुए देवगण ब्रह्मा आदि सब फिर माया से बद्ध हुए उनके ही समीप में अत्यन्त संयत होते हुए स्थित रहते हैं। यदि आप भी उनकी खोज करते हुए वहाँ पर जाते हैं और मेरे बिना अकेले ही वहाँ पर गमन करते हैं तो आप भी वहाँ पर उसी भाँति बद्ध हो जायेंगे और फिर जहाँ से आने में समर्थ नहीं हो सकेंगे। इस कारण से मैं ही वहाँ पर जाता हूँ जहाँ पर गरुड़ध्वज प्रभु स्थित हैं। मैं ही ब्रह्मा और इन्द्र आदि उन सबका क्रम से मोचन करा दूँगा। इस प्रकार से देवगुरु के साथ मिलकर वृषभध्वज ने कहा था और फिर जहाँ पर देवों के समुदाय स्थित थे वहीं पर वे महेश्वर गए थे। वहाँ पर जाकर महादेवजी ने भगवान् विष्णु और ब्रह्माजी से तथा अन्य सब देवगणों से बातचीत करके पूछा था कि आप सब वहाँ पर किसलिए स्थित हो रहे हैं। आप सब तो गमन और आगमन से रहित हो रहे हैं तथा एक जड़ की भाँति ज्ञान से वर्जित हो रहे हैं आप सब ऐसे किसलिए हो गए हैं ? हे देवगणों! यह सब मुझे बताइए। उन महादेवजी के इस वचन का श्रवण करके केशव भगवान् ने धीरे से ब्रह्मा आदि देवों के आगे उस समय में महादेवजी से यह कहा था। श्री भगवान् ने कहा-नीलकूट के शिखर पर से ऊपर की ओर