कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें४४० ॐ श्रीकालिका पुराण ॐ श्रीमद् शंकराचार्य विरचित- श्री कालिकाष्टक ध्यान गलद्रक्तमुण्डावलीकण्ठमाला, महोघोरराव सुदंष्ट्रा कराला। विवस्त्रा श्मशानालया मुक्तकेशी, महाकालकामाकुला कालिकेयम् ॥१॥ वे भगवती काली अपने कण्ठ में रक्त टपकते हुए मुण्डों की माला को पहने हुए हैं, वे अत्यन्त घोर शब्द कर रहीं हैं, उनकी सुन्दर दाढ़ें भयानक हैं, वे वस्त्रहीनां हैं, वे श्मशान में निवास करती हैं, उनके केश बिखरे हुए हैं और वे महाकाल के साथ कामातुर हो रही हैं ॥१॥ भुजेवामयुग्मे शिरोऽसि दधाना, वरं दक्षयुग्मेभयं वै तथैव। सुमध्याऽपि तुङ्गस्तना भरनम्रा, लसद्रक्तसृक्कद्वया सुस्मितास्या ॥२॥ वे अपने दोनों बायें हाथों में नरमुण्ड तथा खड्ग को धारण किये हैं तथा दोनों दाएँ हाथों में वर तथा अभय मुद्रा लिए हैं। वे सुन्दर कटि वाली, उत्तुङ्गस्तनों के भार से झुकी हुई सी, दो रक्तमालाओं से सुशोभित तथा मधुर-मुस्कान से युक्त हैं ॥२॥ शवद्वन्द्वकर्णावतंसा सुकेशी, लसत्प्रेतपाणिं प्रयुक्तैककांची। शवाकारमञ्चाधिरूढा शिवाभि- श्वतुर्दिक्षु शब्दायमानाऽभिरेजे ॥३॥ भावार्थ-उनके कानों में दो शवरूपी आभूषण हैं, उनके केश सुन्दर हैं, वे शवों के हाथों से सुशोभित करधनी को धारण किये हुए हैं, वे शवरूपी मंच पर आरूढ़ हैं तथा उनके चारों ओर शिवाओं का शब्द गूँज रहा है ॥३॥