कालिका पुराण (सटीक हिन्दी अनुवाद सहित)
Kalika Purana with Hindi Translation
महर्षि व्यास द्वारा
स्रोत: कल्याण मन्दिर प्रयाग · कल्याण मन्दिर प्रयाग (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें൘ श्रीकालिका पुराण ൘ ५३ के लिए आप कहेंगे। सो हे महाभाग! आप श्रवण कीजिए। जो मेरे तेज को सहन करने में भागशः समर्थ हो यहाँ पर भार्या के ग्रहण करने में उसी को आप बतलाइये जो योगिनी और कामरूपिणी दोनों ही होवे। जब मैं योग में युक्त होऊँ उस अवसर पर उसी भाँति वह भी योगिनी हो जावेगी और जिस समय में कामवासना में आसक्त होऊँ तो उस अवसर पर वह मोहिनी ही होवेगी। हे ब्रह्माजी! भार्या के लिए उसी को आप बतलाइए जो वरवर्णिनी होवे। वेदों के ज्ञाता महामनीषीगण जो अक्षर को जानते हैं अर्थात् जिस अक्षर का ज्ञान रखते हैं उसी परमज्योति के स्वरूप वाले को जो सनातन है मैं चिन्तन करूँगा। हे ब्रह्माजी! मैं उसी की चिन्ता में सदा आसक्त होता हुआ भावना को गमन किया करता हूँ अर्थात् भावना में निमग्न हो जाता हूँ। उस भावना में जो विघ्न डालने वाली हो वह मेरी होने वाली वाम न होवे। हे महाभाग! आप अथवा विष्णु भगवान् या मैं भी सब पर ब्रह्म के रूप वाले हैं और एक दूसरे के अंगभूत हैं। जो योग्य हो उसका ही अनुचिन्तन करो। हे कमलासन! उसकी चिन्ता के बिना मैं स्थित नहीं रहूँगा उस कारण से ऐसी ही जाया को बतलाइए जो सदा मेरे कर्म के ही अनुगत रहने वाली होवे। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-सम्पूर्ण जगतों के स्वामी ब्रह्माजी ने यह उनके वचन का श्रवण कर स्थिति के सहित प्रसन्न मन वाले ने यह वचन कहा था। ब्रह्माजी ने कहा-हे महादेव! जैसी आपने वर्णित की है वैसी ही एक है जो प्रजापति दक्ष की तनया (पुत्री) हुई है जिसका नाम 'सती' है और वह परम शोभना है। वह ऐसी सुधीमती आपकी भार्या होगी। उसी को जो आपको पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कामिनी है। उसको आप जान लीजिए। हे देवेश्वर! आप तो सभी आत्माओं में वर्तमान रहने वाले हैं। मार्कण्डेय मुनि ने कहा-इनके अनन्तर ब्रह्माजी के वचन के उपरान्त भगवान् मधुसूदन ने कहा कि जो कुछ भी ब्रह्माजी ने कहा है वह सब आप करिए। उन शंकर प्रभु के द्वारा 'मैं वही मरूंगा', ऐसा कहने पर वे दोनों (ब्रह्मा और विष्णु) अपने-अपने आश्रमों को चले