कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)
Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा
DevanagariHindipublished259 पृष्ठ
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चतुर्दश अध्याय-३ ] [ ४६७ व्याधि आदि सभी दुख भूमण्डल से अदृश्य हो गये ।३२। ब्राह्मण वेदपाठी हुए, स्त्रियाँ पतिव्रत धर्म के पालन पूर्वक धर्मानुष्ठान मे लगी । सर्वत्र पूजन और होम होने लगे । क्षत्रिय भी यज्ञादि शुभ कर्मों मे उद्यत हुए । विष्णु-पूजन मे रत रहते हुए वैश्य गण भी वस्तु विनिमय का धर्म पूर्वक व्यापार करने लगे । शूद्रगण द्विज सेवा-परायण हुए । सभी प्राणी भगवान् का गुण कीर्तन, श्रवण और उपासना मे तत्पर रहते हुए जीवनचर्या चलाने लगे ।३३।