भारतकोश
कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

कल्कि पुराण (संस्कृत मूल एवं हिन्दी अनुवाद)

Kalki Purana with Sanskrit Original & Hindi Translation

महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास द्वारा

DevanagariHindipublished259 पृष्ठ

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सप्तम अध्याय-१ ] ३ उन्हीं भुजाओ का मन मे स्मरण करता हूँ ।१८। हाथी की सूँड जैसी जिन भुजाओ मे मणिमय आभूषण और शङ्ख पद्म आदि विभूषित हैं, जिन भुजाओ की लाल वर्ण वाली अङ्गुलियाँ जानु स्पर्श कर रही हैं, उन कमलासना पद्मा को प्रसन्न करने वाली भुजाओ का मैं स्मरण करता हूँ ।१९। मृणाल के समान जिस कठ मे मुखारविन्द की तीन रेखाये और वनमाला सुशोभित है तथा जो कठ मोक्ष-मन्त्र के शुभफल का गुच्छा- स्वरूप हैं, उस श्रीहरि-कठ का मैं स्मरण करता हूँ ।२०। रक्ताम्बुज दशनहासविकाशरम्य रक्ताधरोष्ठधर कोमलवाक्सुधाढ्यम् । सनमानसीद्भवचलेक्षणपत्रचित्रं लोकाभिरामममलञ्च हरे. स्मरामि ।२१ शूरात्मजावसथगन्धविदसुनाश भ्रूपल्लव स्थितिल- यादयकर्मदक्षम् । कामोत्सवञ्च कमलाहृदयप्रका- श सञ्चिन्तयामि हरिवक्रविलासकक्षम् ।२२ कर्णौ लसनमकरकुण्डलगण्डलोलौ नानादिशाश्च नभसश्च विकासगेहौ । लोलालकप्रचयचुम्बनकु- ञ्चिताग्रौ लग्नौ हरेर्मणिकिरीटटे स्मरामि ।२३ भाल विचित्रतिलक प्रियचारुगन्धगग्रोचनारचतया ललनाक्षिसौख्यम् । ब्रह्मैकधाममणिदान्तिकिरीट जुष्ट ध्यायेन्मनोनयनहारकमोश्वरस्य ।२४। लाल कमल के समान लाल अधरो के मध्य मुसकराते हुए दाँत, शोभामय कोमल वचन, मन को प्रसन्नता प्रदान करने वाले चचल नेत्र, जिस मुखमडल मे सुशोभित हैं, प्रभु के उस मुखारविन्द का मैं स्मरण करता हूँ ।२१। जिन भृकुटि पत्रों की कृपा से यम सदन की गध भी नही आती जिनके समीप ही नासिका सुशोभित रहती है, जिनके संकेतमें सृष्टि, स्थिति एव प्रलय निहित हैं, जो मदनोत्सव को प्रकट करने वाले एवं

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