कल्याण: उपनिषद् अङ्क
Kalyan Upanishad Ank
गीताप्रेस द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 589, कुल 832 में से
संदर्भ में पढ़ेंखण्ड १ ] * महान्तं विभुमात्मानं मत्वा धीरो न शोचति * ५४७ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यानि च नक्षत्राणि भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ २९ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् ये च नवग्रहा भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ३० ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् ये चाष्टौ लोकपाला भूर्भुवं स्वस्तस्मै वै नमो नम.॥ ३१ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् ये चाष्टौ वसवो भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३२ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् ये चैकादश रुद्रा भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३३ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् ये च द्वादशादित्या भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम.॥ ३४ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् यच्च भूतं भव्यं भविप्यद् भूर्भुव. स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३५ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् यश्च ब्रह्माण्डस्यान्तर्बहि- र्व्याप्नोति विराट् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३६ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यो हिरण्यगर्भो भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३७ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् या प्रकृतिर्भूर्भुव. स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३८ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् यश्चोङ्कारो भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ३९ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यश्चतस्रोऽर्द्धमात्रा भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ४० ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् य परमपुरुषो भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ४१ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यश्च महेश्वरो भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ४२ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यश्च महादेवी भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम.॥ ४३ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र. स भगवान् य ओं नमो भगवते वासुदेवाय यो महाविष्णुर्भूर्भुव. स्वस्तस्मै वै नमो नम. ॥४४॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् य परमात्मा भूर्भुव. स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ४५ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यो विज्ञानात्मा भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम. ॥ ४६ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्र स भगवान् यः सच्चिदानन्दैक-रसात्मा भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ४७ ॥ 'ॐ जो जगत्-प्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे निश्चय ही भगवान् (षड्विध ऐश्वर्यसे सम्पन्न) हैं, अद्वितीय परमानन्द-स्वरूप हैं। जो सर्वोत्कृष्ट ब्रह्म तथा भूर्भुवः स्वः—ये तीनों लोक हैं, वह सब भी वे ही हैं, उन श्रीरामचन्द्रजीको निश्चय ही मेरा बारवार नमस्कार है। ॐ जो सर्वत्र विख्यात श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे निश्चय ही भगवान् हैं, तथा जो अखण्डैकरसस्वरूप परमात्मा एव भू', भुवः, स्वः—ये तीनों लोक हैं, वह सब भी वे ही हैं। निश्चय ही उन्हें मेरा बारवार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे निश्चय ही भगवान् हैं, तथा जो आनन्दमय, अमृतमय ब्रह्म तथा भू आदि तीनों लोक हैं, वह सब भी उन्हींका स्वरूप है। उन भगवान् श्रीरामको निश्चय ही मेरा बारवार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो तारक ब्रह्म और भूः, भुव, स्व. नामसे प्रसिद्ध तीनों लोक हैं, वह सब कुछ उन्हींका स्वरूप है। उन भगवान् श्रीरामको मेरा बारबार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो ब्रह्मा, विष्णु और शिव हैं, जो सर्वदेवमय परमात्मा हैं और जो भू आदि तीनों लोक हैं, वे भी उन्हींके स्वरूप हैं। उन भगवान् श्रीरामको निश्चय ही मेरा बारबार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो अङ्गोंसहित सम्पूर्ण वेद, उनकी शाखाएँ, पुराण तथा भू आदि तीनों लोक हैं, उन सबके रूपमें भी वे ही हैं। उन भगवान्को निश्चय ही मेरा बारवार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो जीवात्मा और भू आदि तीनों लोक हैं, वे भी उन्हींके स्वरूप हैं। उन भगवान्को निश्चय ही मेरा बारबार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध ,श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो सम्पूर्ण प्राणियोंका अन्तरात्मा और भू आदि तीनों लोक हैं, वे भी उन्हींके स्वरूप हैं। उन श्रीरामको निश्चय ही मेरा बारवार नमस्कार है। ॐ जो सुप्रसिद्ध श्रीरामचन्द्रजी हैं, वे अवश्य ही भगवान् हैं, तथा जो देवता, असुर और मनुष्य आदि भाव १ सम्पूर्ण ऐश्वर्य, सम्पूर्ण धर्म, सम्पूर्ण यश, सम्पूर्ण श्री, सम्पूर्ण ज्ञान और सम्पूर्ण वैराग्य—इन छ का नाम भग है। जिन पूर्णतम परमेश्वरमें ये छहों परिपूर्णरूपसे नित्य-निरन्तर स्थित रहते हैं, वे 'भगवान्' कहे गये हैं।