कल्याण: उपनिषद् अङ्क
Kalyan Upanishad Ank
गीताप्रेस द्वारा
स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)
पृष्ठ 588, कुल 832 में से
संदर्भ में पढ़ें५४६ * श्रीरामोत्तरतापनीयोपनिषद् * [ खण्ड १ दूर कर देता है तथा वह जन्मान्तरके पापोंका नाश कर डालता है ॥ ४ ॥ तदनन्तर उन प्रसिद्ध याज्ञवल्क्यजीसे भरद्वाजने पूछा— 'भगवन् ! किन मन्त्रोंद्वारा स्तुति करनेपर भगवान् श्रीराम प्रसन्न होते हैं और अपने स्वरूपका प्रत्यक्ष दर्शन कराते हैं? उन मन्त्रोंका आप हमें उपदेश करें।' तब वे प्रसिद्ध महर्षि याज्ञवल्क्यजी बोले—'ब्रह्मन् ! जिस प्रकार भगवान् शङ्करको वरदान देते हुए श्रीरामजीने काशीका महत्त्व बताया था, उसी प्रकार किसी समय ब्रह्माजीको भी उन्होंने वैसा ही उपदेश दिया था। उनके द्वारा ऐसा उपदेश पाकर ब्रह्माजीने निम्नाङ्कित गद्यमयी गाथासे उन्हें नमस्कार किया। जो सम्पूर्ण विश्वके आधार और महाविष्णुरूप हैं, रोग- शोकसे रहित नारायण हैं, परिपूर्ण आनन्द-विज्ञानके आश्रय हैं और परम प्रकाशरूप हैं, उन परमेश्वर श्रीरामका मन ही- मन स्तवन करते हुए ब्रह्माजीने उनकी इस प्रकार स्तुति की—
ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवानद्वैतपरमानन्दात्मा यत् परं ब्रह्म भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्चाखण्डैकरसात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्च ब्रह्मानन्दामृत भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ३ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यत् तारक ब्रह्म भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ४ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यो ब्रह्मा विष्णुरीश्वरो य सर्वदेवात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ५ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् ये सर्वे वेदा साङ्गाः सशाखाः सपुराणा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ६ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यो जीवात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ७ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान्यः सर्वभूतान्तरात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ८ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान्ये देवासुरमनुष्यादि- भावा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ९ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् ये मत्स्यकूर्माद्यवतारा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १० ॥
ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्च प्राणो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ ११ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् योऽन्त करणचतु- ष्टयात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १२ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्च यमो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १३ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्चान्तको भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १४ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यश्च मृत्युर्भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १५ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यच्चामृतं भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १६ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यानि पञ्चमहाभूतानि भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १७ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यः स्थावरजङ्गमात्मा भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १८ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् ये च पञ्चाग्नयो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ १९ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या सप्तमहा- व्याहृतयो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २० ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या विद्या भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २१ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या सरस्वती भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २२ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या लक्ष्मीर्भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २३ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या गौरी भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २४ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् या जानकी भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २५ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यच्च त्रैलोक्यं भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २६ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यः सूर्यो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २७ ॥ ॐ यो वै श्रीरामचन्द्रः स भगवान् यः सोमो भूर्भुवः स्वस्तस्मै वै नमो नमः ॥ २८ ॥