भारतकोश
कल्याण: उपनिषद् अङ्क

कल्याण: उपनिषद् अङ्क

Kalyan Upanishad Ank

गीताप्रेस द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press, Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished832 पृष्ठ

पृष्ठ 611, कुल 832 में से

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पृष्ठ 611
  • महान्तं विभुमात्मानं मत्वा धीरो न शोचति * ५६५ ॐ योऽसौ भूतात्मा गोपाल. ॐ तत्सद् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९२ ॥ ॐ योऽसावुत्तमपुरुषो गोपाल ॐ तत्सद् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९३ ॥ ॐ योऽसौ परब्रह्म गोपाल ॐ तत्सद् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९४ ॥ ॐ योऽसौ सर्वभूतात्मा गोपाल. ॐ तत्सद् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९५ ॥ ॐ योऽसौ जाग्रत्स्वप्नसुषुप्तिमतीत्य तुर्यातीत ॐ तत्सद् भूर्भुव स्वस्तस्मै वै नमो नम ॥ ९६ ॥ ॐ (सच्चिदानन्दस्वरूप) प्राणात्माको नमस्कार है। ॐ तत्, सत्—इन तीनों नामोंसे प्रतिपादित होनेवाले 'भूर्भुव स्वः'— तीनों लोकरूप प्राणात्मा परमेश्वरको बारबार नमस्कार है। ॐ सबका आकर्षण करनेवाले कृष्ण, गौओंके स्वामी गोविन्द एव. गोपीजनोंके प्राणवल्लभ उन श्यामसुन्दरको बारबार नमस्कार है, जो 'ॐ, तत्, सत्' इन तीनों नामोंसे प्रतिपादित होनेवाले हैं तथा 'भूर्भुवः स्वः' इन तीनों लोकोंके रूपमें प्रकट हैं। 'ॐ, तत्, सत्' ये तीन जिनके नाम हैं तथा 'भू भुव, स्व'—ये तीनों जिनके रूप हैं, उन अपानवायुरूप अपानात्मा परमेश्वरको बारबार नमस्कार है। 'ॐ, तत्, सत्'—इन तीनों नामोंसे कहे जानेवाले 'भूर्भुव. स्व.'स्वरूप उन श्रीकृष्ण, प्रद्युम्न और अनिरुद्धको अवश्य बारबार नमस्कार है। 'ॐ, तत् सत्'—इन तीन नामोंवाले तथा 'भू', मुव. और स्व'—इन तीन रूपोंवाले उन व्यानवायुरूप व्यानात्मा परमेश्वरको बारबार नमस्कार है। 'ॐ, तत्, सत्'—इन तीनों नामोंसे कहे जानेवाले भूतल, अन्तरिक्ष एव स्वर्गरूप उन श्रीकृष्ण और बलरामको निश्चय ही अनेक बार नमस्कार हैं। 'ॐ, तत्, सत्'—इन तीनों नामोंसे कहे जानेवाले, 'भूर्भुव स्व.'स्वरूप उन उदानवायुके रूपमें प्रकट उदानात्मा परमेश्वरको बारबार नमस्कार है। 'ॐ, तत्, सत्'—इन त्रिविध नामोंवाले तथा 'भूर्भुव. स्व.'—इन त्रिविध रूपोंवाले उन सच्चिदानन्दमय देवकीनन्दन श्रीकृष्णको अवश्य ही बारबार नमस्कार है। 'ॐ, तत्, सत्'—इन नामोंसे प्रतिपादित होनेवाले 'भूर्भुव स्व.'स्वरूप उन समान- वायुरूप समानात्मा परमेश्वरको नमस्कार है, नमस्कार है।

'ॐ, तत्, सत्'—इन तीन नामोंसे प्रसिद्ध और 'भूर्भुवः स्व'—इन तीन रूपोंवाले उन स्वस्वरूपभूत सच्चिदानन्दमय गोपालको निश्चय ही नमस्कार है, नमस्कार है। ॐ जो वे प्रधानात्मा गोपाल ह, वे ही 'ॐ, तत्, सत्'—इन तीनों नामों- द्वारा प्रतिपादित होनेवाले तथा 'भूर्भुव स्व.'—इन तीनों लोकों- के रूपमें प्रकट हैं, उन्हें अवश्य ही नमस्कार है, नमस्कार है। ॐ वे जो इन्द्रियात्मा गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्' नामोंसे प्रसिद्ध हैं और वे ही भूतल, अन्तरिक्ष एव स्वर्गरूप हैं; उन्हें निश्चय ही बारबार नमस्कार है। ॐ वे जो भूतात्मा गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्' नामोंसे प्रसिद्ध हैं और वे ही भूतल, अन्तरिक्ष एव स्वर्गरूप हैं, उन्हें निश्चय ही बारबार नमस्कार है। ॐ वे जो उत्तम पुरुष ( पुरुषोत्तम ) गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्'—इन तीनों नामोंसे कहे जानेवाले और भूतल, अन्तरिक्ष एव स्वर्गरूप हैं, उनके लिये निश्चय ही बारबार नमस्कार है। ॐ वे जो परब्रह्म गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्'—ये तीन नाम धारण करते हैं तथा वे ही 'भूर्भुव. स्वः'— इन तीनों लोकोंके रूपमें प्रकट होते हैं, उनको निश्चय ही बारबार नमस्कार है। ॐ वे जो सर्वभूतात्मा गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्'—ये तीन नाम धारण करते हैं और वे ही 'भूर्भुवः स्व.'—इन तीनों लोकोंके रूपमें प्रकट होते हैं, उनके लिये निश्चय ही मेरा बारबार नमस्कार है। ॐ वे जो जाग्रत्, स्वप्न और सुषुप्ति—इन तीनों अवस्थाओंको पार करके तुरीय पदपर प्रतिष्ठित भगवान् गोपाल हैं, वे ही 'ॐ, तत्, सत्' कहे जाते हैं और वे ही भूतल, अन्तरिक्ष तथा स्वर्गरूप हैं। उनको निश्चय ही मेरा बारबार नमस्कार है ॥ ८०-९६ ॥ वे एकमात्र देवता भगवान् गोपाल ही सम्पूर्ण भूतोंमें अन्तर्यामीरूपसे छिपे हुए हैं। वे सर्वत्र व्यापक और सब प्राणियोंके अन्तरात्मा हैं। वे ही सम्पूर्ण कर्मोंके अध्यक्ष (फल- दाता स्वामी ), समस्त भूतोंके निवासस्थान, सबके साक्षी, चैतन्यस्वरूप, केवल और निर्गुण हैं ॥ ९७ ॥ ( भगवान् गोपालकी विभूतिस्वरूप देवता भी वन्दनीय हैं—) रुद्रको नमस्कार है। आदित्यको नमस्कार है। विनायकको नमस्कार है। सूर्यको नमस्कार है। विद्या (सरस्वती)-को नमस्कार है। इन्द्रको नमस्कार है। अग्निको नमस्कार है। यमको नमस्कार है। निर्ऋतिको नमस्कार है।

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