कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)
Kamandakiya Nitisara with Hindi Commentary
आचार्य कामन्दक / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४० कामन्दकीय नीतिसार।
ব্যক্তির) पश्चात् पश्चात् प्रवेश करिबे। विश्वस्त द्वाररक्षकगण गृहमध्ये प्रविष्ट लोकदिगके शोधित करिबे अर्थात् ताहारिगेर लुक्कायित अस्त्र शस्त्रादि अनुसंधान करिया देखिबे। ঐ लुक्कायितभावे अस्त्रधारिगण स्पष्टभावे बलिबे ये ताहारा ঐ दुष्ट व्यक्ति कर्तृक राजाके बध करिबार जन्य नियुक्त हइयाछे। एइरूपे दुष्ट व्यक्तिदिगके दोषी करिया प्रजापुञ्जेर वृद्धिर निमित्त राजलक्ष्मीर उत्कर्ष साधनेर जन्य राजा शल्य उद्धार करिबेन अर्थात् राज्येर अनिष्टकारी दुष्टेर दमन करिबेन ॥११—१३॥ सूक्ष्म परिपुष्ट बीजाङ्कुर सर्व्वतोभावे रक्षित हइया येमन यथाकाले उत्तम फलप्रद हय सेइरूप प्रजागण परिपुष्ट ओ रक्षित हइले यथासमये राजार शुभकारी हइया थाके ॥१४॥ राजा तीक्ष्ण दण्ड प्रयोग करिले प्रजावर्ग उद्वेजित हय एवं मृदु दण्ड प्रयोग करिले राजा पराभूत हन; अतएव निरपेक्ष- भावे यथायथ दण्ड प्रयोग करिबेन ॥१५॥ इति कामन्दकीय नीतिसारे कण्टकशोधन नामक षष्ठ सर्ग॥ सप्तम सर्ग। राजपुत्ररक्षण। राजा प्रजापुञ्जेर एवं निजेर कल्याणेर जन्य निज पुत्रेर रक्षा करिबेन। येहेतु पुत्रगण रक्षित ना हइले ताहारा अर्थलोलुप हइया एइ राजाकेइ हत्या करिया थाके ॥१॥ निरङ्कुश मदमत्त गजेर न्याय राजपुत्रगण अभिमानभरे भ्राता किंवा पिताकेओ मारिया फेले ॥२॥ व्याघ्र याहार गन्ध पाइयाछे सेइरूप मांसके येमन अतिकष्टे रक्षा करिते हय सेइरूप मदगर्ब्बित राजपुत्रगणेर प्रार्थित राज्यओ सर्व्वतोभावे बहु कष्टे रक्षित हय ॥३॥ ताहारा रक्षित अर्थात् सम्यकरूपे पालित ओ शासित हइयाओ यदि कोन प्रकार छिद्र प्राप्त हय ताहा हइले