भारतकोश
कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

Kamandakiya Nitisara with Hindi Commentary

आचार्य कामन्दक / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished164 पृष्ठ

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४४ कामन्दकीय नीतिसार। गरमजबुत एरुप नौकाय चड़िबेन ना ॥३३॥ ग्रीष्मेर दिने पाड़ेर धारे विश्वस्त सैन्यगण रहियाछे देखिया कुम्भीर एमन कि माछओ थाकिबे ना—एरुप जले बन्धुगणेर सहित स्नान करिबेन ॥३४॥ बने बेड़ाइते याइबेन ना; नगरेर बाहिरे विशुद्ध बागान-बाड़ीते बेड़ाइते याइबेन; निजेर वयसेर अनुरूप स्फूर्ति उत्तमरूपे करिबेन किन्तु विषयेर उपभोगे रत हइया ताहातेइ मातिया याइबेन ना ॥३५॥ [राजार] पश्चाद्भागेर यान सुविनीत ओ उत्तम वेगयुक्त हइबे, गमन पथे खात गर्त्त ऊँचू नीचु प्रभृति थाकिबे ना एवं उहा अभ्यस्त पथ हइबे, आर ये वन विशेषभावे परीक्षित हइयाछे एवं प्रान्तसीमा रक्षित हइयाछे এইরূপ बने लक्ष्य सिद्धिर (टिप करार) जन्य [राजा] अल्प आहारी हइया मृगयाय याइबेन ॥३६॥ मातार निकटे याइते इच्छा हइलेओ अग्रे गृहशोधन कराइबेन अर्थात् कोन विपदेर सम्भावना आछे कि ना परीक्षा करिबेन एवं विश्वस्त अस्त्रधारीगण सङ्गे लइया मातार गृहे प्रवेश करिबेन एवं निर्ज्जने बा सङ्कट स्थाने थाकिबेन ना ॥३७॥ (राज्येर) कोन उत्पात उपस्थित ना हइले यखन बातासे खूब धूलि उड़ितेछे एरुप समय, अविश्रान्त धाराय वृष्टि पड़ितेछे एरुप समय, प्रखर रौद्रेर समय एवं अन्धकारेर समय अर्थात् दुर्योगेर समय राजा कदाच बाहिर हइबेन ना ॥३८॥ बहिर्गमन ओ प्रवेशकाले नरपति राजपथेर चारिदिक हइते लोगजन सराइया रास्त़ाय लोकेर चलाचल बन्ध करिया समारोह्हेर সহিত গমন करिबेन ॥३९॥ यात्रा (देवतार उत्सव) ओ साधारण उत्सव एवं समाज (सभा)— एइ सकल स्थानेर येखाने अत्यधिक लोकेर भीड़ सेखाने [राजा] याइबेन ना, आर अनियमित समयेओ याइबेन ना ॥४०॥ कञ्चुक ओ उष्णीषधारी नपुंसक, कुब्ज, किरात जाति एवं वामनगण कर्तृक सेवित हइया राजा अन्तःपुरे विचरण करिबेन ॥४१॥ उपधाशुद्ध, प्रभुर चित्तज्ञ नपुंसक वामन प्रभृति अन्तःपुरेर अमात्यगण शस्त्र अग्नि ओ