भारतकोश
कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

Kamandakiya Nitisara with Hindi Commentary

आचार्य कामन्दक / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished164 पृष्ठ

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७म सर्ग ] आत्मरक्षा। ४५ विष परित्याग करिया राजाके अप्रमत्तभावे खेला कराइबे ॥४२॥ नीतिवृद्धेर अनुमोदित आयुक्त-कुशल ( कर्त्तव्यकार्य्ये निपुण ) परिहित- वर्म्म अन्तःपुररक्षी सैन्यगण राजाके अन्तःपुर मध्ये रक्षा करिबे ॥४३॥ आशी वत्सर वयसेर पुरुष, पञ्चाश वत्सरेर स्त्रीलोक एवं ये सकल आगारिक अर्थात् कुब्ज वामन खोजा प्रभृति इहादेर द्वारा अवरोधेर अर्थात् पुराङ्गनागणेर शौच जानिबेन अर्थात् इहारा उपधाशुद्ध कि ना ताहा बुझिबेन ॥४४॥ गणिकागण स्नान करिया वस्त्र परिवर्तन पूर्वक विशुद्ध उत्तम पुष्पमालाय विभूषित हइया राजार आराधना करिबे ॥४५॥ अन्तःपुरचारी लोक ऐन्द्रजालिक, जटाधारी ( संन्यासी ), मुण्डितमस्तक ( बौद्ध वैष्णव प्रभृति ) एवं बाहिरेर दासदासीर सहित संस्रव करिबे ना ॥४६॥ अवरोधेर लोक सकल कोन कारण उपस्थित हइले बाहिरे याइबार समय ओ भितरे आसिबार समय द्वारपालके अभिज्ञान देखाइया गमनागमन करिबे ॥४७॥ राजा पीड़ित अनुजीवीर सहित देखा करिबेन ना, तबे मृत्युन्मुख हइले देखा करिबेन ; ( पाठान्तरे—गुरुतर कार्य्यानुरोधे देखा करिबेन ) ; येहेतु मरणोन्मुख व्यक्ति सकलेरइ गुरु ( पाठान्तरे—कार्य्यइ सकलेर गुरु ) ॥४८॥ राजा स्नानान्ते सुगन्धि द्रव्य माखिया उत्कृष्ट माला परिया एवं मनोहर भूषणे विभूषित हइया कृतस्नाना विशुद्ध-वस्त्र-परिधाना एवं सुभूषिता राजमहिषीर सहित देखा करिबेन ॥४९॥ पुरेर बाहिर हइते एवं आत्मीयेर निकट हइते एकबारेइ देवीर गृहे याइबेन ना अर्थात् स्त्रीर घरेर संवाद ना लइया তাঁহার सहित देखा करिबेन ना। ‘आमि स्त्रीर अत्यन्त प्रिय’ एइ विश्वास स्त्रीलोकदिगेर करिबे ना ॥५०॥ [ केन विश्वास करिबे ना, ताहार कारण देखान हइतेछे ] कलिङ्गराज भद्रसेन महिषीर गृहे आसिले सेखाने वीरसेन स्वीय भ्राताके बध करे एवं करूष-देशाधिपति महिषीर गृहे आसिले তাঁহার औरस पुत्र मातार शय्यार नीचे लुकाइया थाकिया पिताके मारिया फेलियाछिल ॥५१॥ ‘एइ खइ मधुमाखा’ इहा