भारतकोश
कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

कामन्दकीय नीतिसार (आचार्य कामन्दक - प्राचीन भारतीय राजनीति शास्त्र)

Kamandakiya Nitisara with Hindi Commentary

आचार्य कामन्दक / पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र द्वारा

DevanagariSanskritpublished164 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 164 में से

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८२ कामन्दकीय नीतिसार। सिद्धि हय; इहा हइतेइ मन्त्रसिद्धि बुझिते पारा याय ॥४२॥ लघु-उत्थान, विघ्नशून्यता एवं समुदाय सहकारि कारणगुलिर संयोग--एइ कारणगुलि कार्य्येर सिद्धिकेइ जानाइया देय ॥४३॥ सर्व्वदा मन्त्रणार स्मरण राखिबे ओ यत्न सहकारे उहा गोपने राखिबे । सयत्ने मन्त्रगुप्ति ना करिले ऐ मन्त्र प्रकाश पाइया अग्निर न्याय दग्ध करे ॥४४॥ * ॥ मन्त्र-रक्षापरायण हइया विश्वस्त व्यक्तिर ओ ताहार विश्वस्त पात्रगणेर निकट हइते मन्त्रणा गुप्त राखिबे । कारण उक्त रूपे मन्त्र गोपन ना राखिले विश्वासीगणेर मध्य हइतेइ उहा प्रकाश हइया पड़े । अर्थात् विश्वासी व्यक्ति ताहार विश्वासीके बले एवं ऐ विश्वासी ताहार विश्वासीके बले ; एइरूपे मन्त्रेर बहुल प्रचार हइया साधारण व्यक्त हइया पड़े । ( पाठांतरे--बार बार मन्त्र बलाबल करिबे ना, सयत्ने मन्त्रके गोपने राखिबे, येहेतु मन्त्रके गोपने ना राखिले आत्मीय परम्परार्य सर्व्वजन विदित हइया पड़े ॥११।६४ कलि, सं) ॥४५॥ मद्यपानादि जन्य मत्तता, प्रमाद (असावधानता), काम (स्त्रीके विश्वास करिया मन्त्रणार कथा बला ), निद्रावस्थाय प्रलाप, ( थाम प्रभृतिर आड़ाले ) प्रच्छन्नभावे स्थित व्यक्ति, सहचरी ओ अवमत ( बोबा बा शुक सारिका प्रभृति उपेक्षार पात्र ) एइ समुदाय मन्त्रणा-भेद करिया देय ॥४६॥ थामशून्य स्थाने, जानाला रहित स्थाने, आर एकबारे फाँकाय ( पाठांतरे —चारिदिक् घेरा स्थानेर मध्यगत घरे ), छादेर उपर ओ वनमध्ये— एइ सकल स्थाने सर्व्वजनेर अविदित भावे मन्त्रणा करिबे ॥४७॥ मनुर मते, मन्त्रिगणेर मन्त्रिमण्डल अर्थात् मन्त्रणा करिबार स्थान द्वादश प्रकार । बृहस्पतिर मते षोडश प्रकार एवं शुक्राचार्य्येर मते विंशति प्रकार । इहार तात्पय्यार्थ एइ ये, द्वादश-राजक-मण्डलेर जन्य द्वादश मन्त्री ; एइ द्वादश मन्त्री एवं अरि, विजिगीषु, मध्यम ओ उदासीन सम्बन्धे चारिजन मन्त्री ; मोट—षोलजन मन्त्री । दशराजक-मण्डलेर दशजन मन्त्री ओ ऐ मण्डलेर द्रव्य एवं प्रकृति

  • एइ श्लोकटि कलिकता संस्करणे नाइ ।
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