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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 189

अयोध्याकाण्ड १७९

इस प्रकार दान करके, भगवान् रंगनाथ के सद्यःप्रसूत कमल-जैसे चरणों को नमस्कार करके, ( भगवान् की ) प्रार्थना करके तथा मंदिर की परिक्रमा करके कौशल्या अपने दोषहीन संपत्ति से भरे प्रासाद मे आईं और व्रत आदि अनुष्ठान करने लगीं । ( १—६८ )


अध्याय ३

मंथरा-षड्यंत्र पटल

उधर सुगन्धित पुष्पमालाधारी चक्रवर्ती ने गणितज्ञों ( मुहूर्त्त का विचार करनेवाले ) को देखकर, उनकी स्तुति करके फिर कहा, तीक्ष्ण परशुधारी ( परशुराम ) को परास्त करनेवाले राम को मुकुट पहनाने के लिए सुयोग्य शुभ दिन बतलाइए ।

ज्योतिष के सब विद्वानो ने उत्तर दिया, आपके पुत्र के लिए योग्य दिन कल ही है । यह आनन्ददायक वचन सुनकर वीर-वलय से भूषित, मत्तगज-सदृश चक्रवर्ती ने आज्ञा दी कि निष्कलंक तपस्यावान् तथा अमृत-समान उत्तम वसिष्ठ को ले आओ । मुनिवर आ पहुँचे ।

दशरथ ने उन मुनिवरो से कर जोड़कर निवेदन किया, शुभ मुहूर्त्त कल ही है ; अतः कोदण्डधारी राम से आज ही आवश्यक व्रत करावें तथा उसे हितकारी उपदेश भी दें ।

मुनिवर भी अपनी उमंग के साथ होड़ करते हुए आगे बढ़ चले और मनु-कुल के प्रभु ( राम ) के प्रासाद में जा पहुँचे । मुनिवर का आगमन सुनकर पुष्पमाला-भूषित ( राम ) उनके सम्मुख आये और उनको अपने भवन के भीतर ले गये ।

अशिथिल तपोव्रत से सम्पन्न मुनिवर ने शास्त्रो के ज्ञाता उस उदार पुरुष ( राम ) से कहा—हे युद्धचतुर ! तुम पर अपार प्रेम रखनेवाले चक्रवर्ती तुम को कल ही राज्य देना चाहते हैं ।

यह कहकर वे फिर राम की ओर देखकर बोले—मुझे कुछ हितकारी वचन तुमसे कहने हैं। उन वचनों को सावधान होकर सुनो और उन पर दृढ रहो, फिर घनी मालाओ से भूषित राम से कहने लगे ।

वेदज्ञ लोग, श्यामवर्ण विष्णु, ललाटनेत्र ( शिव ), कमलभव ( ब्रह्मा ), उत्पन्न पञ्चभूतों तथा सत्य से भी श्रेष्ठ होते हैं, अतः तुम सच्चे हृदय से उनका आदर करना ।

हे वत्स ! देवताओं में ऐसे लोगो की गिनती नहीं है, जो वेदज्ञो के क्रोध से पतन को प्राप्त हुए और जिन्होने उनकी कृपा से शीघ्र उद्धार प्राप्त किया ।

हे वत्स ! वेदज्ञ ऐसे होते हैं, अतः कठोर पापो से रहित इन ब्राह्मणो के चरणों को अपने मुकुट पर धारण किये हुए उनकी स्तुति करो और उनके बताये धर्म के मार्ग पर स्थिर रहो ।