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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 279

अयोध्याकाण्ड २६१

चक्रवर्त्ती के कुमार ने दस दिन तक किये जानेवाले पितृकर्म को, एक-एक दिन को एक-एक युग के समान व्यतीत करते हुए तथा अत्यन्त वेदना के साथ, शास्त्रोक्त विधान से पूर्ण किया।

सब पितृ-संस्कार पूर्ण कराके, अपने कार्य-भार से मुक्त होकर महान् तपस्वी वसिष्ठ त्रिसूत्रयुक्त यज्ञोपवीत से शोभायमान ब्राह्मणो के द्वारा अनुसृत होते हुए, विजयी भाले को धारण करनेवाले भरत के निकट पहुँचे।

कुल-क्रमागत मंत्री यह विचार कर कि बिना राजा के राज्य का रहना उचित नहीं है, भरत को राजा बनाने का दृढ निश्चय करके, उस राज्य के बडे ज्ञानवान् लोगों को साथ लेकर आये। ( १—१४५ )

अध्याय १०

वन-प्रस्थान पटल

मन्त्रणा-कुशल मंत्री (भरत के प्रति) प्रेम से भरे हृदय के साथ यह सोचते हुए कि परम्परा से प्राप्त वेदों को अधिगत करनेवाले तथा तपस्या के सब तत्त्वों को जाननेवाले वसिष्ठ उस राजसभा में उपस्थित हैं, शीघ्र सभा मे आ पहुँचे और भरत को नमस्कार किया।

तपस्या के प्रभाव से गगन मे भी संचरण करने की शक्ति रखनेवाले मुनियो के साथ मंत्री, नगर के लोग, सेनापति, राजा तथा सब बुद्धिमान् एवं विवेकी पुरुष, सुन्दर वीर (भरत) को यथाक्रम घेरकर बैठ गये।

जब सब लोग इस प्रकार बैठे हुए थे, तब ज्ञानी तथा रथ चलाने मे दक्ष सुमन्त्र ने विजयी चक्रवर्ती के कुमार (भरत) को अपने मन के विचार सूचित करने के उद्देश्य से सर्वज्ञ मुनिवर (वसिष्ठ) के मुख की ओर देखा।

तपस्वी वसिष्ठ ने सुमन्त्र के अपनी ओर देखने से, वचनों के बिना ही, उसके मन के आशय को जान लिया। फिर चक्रवर्ती के कुमार से बोले—राज्य की रक्षा करो। यही तुम्हारा कर्त्तव्य है।

(वसिष्ठ ने भरत से कहा—) हे दोष-रहित ! गुणवान्, वेदज्ञ, अपूर्व तपस्या-सपन्न, वृद्ध, नरेश आदि जो तुम्हारे पास आये हैं, इनके आगमन का प्रयोजन यही है कि नीति तथा धर्म को स्थिर बनायें (और उसके लिए तुम्हे राजा बनाये)। तुम इस बात को अपने मन मे समझ लो।

धर्म नामक अनुपम वस्तु का सबसे आचरण कराना तथा उसको स्थापित करना कठिन कार्य है। हे तात ! तुम इस विषय को भली भाँति समझ लो। यह धर्म इहलोक ओर परलोक—दोनो को प्रदान करनेवाला है। स्वच्छ चित्तवाले ही इसका पालन कर सकते हैं।