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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 332
३२२कंब रामायण

यों कहकर कमल-समान नयनोंवाले (राम) का प्रेम से आलिंगन करके उनका सिर सूंघा और आनन्दाश्रु बहाते हुए कहा—हे समर्थ कुमार। तुमने उन चक्रवर्ती को तथा मुझको अपार यश दिया है।

फिर, उस महात्मा (जटायु) ने कंकणों से भूषित हंस-सदृश देवी (सीता) को देखकर (राम से) पूछा—हे चक्रवर्ती कुमार ! यह स्त्री कौन है ? कहो।

तब राम के अनुज ने पूर्वकाल में साकार अंधकार-सदृश ताडका के वध से लेकर शिव-धनु का भंग करने तक की सारी घटनाएँ तथा वन-गमन तक के अन्य प्रसंग भी कह सुनाये।

उज्ज्वल शिरवाले वयोवृद्ध (जटायु) ने सब सुनकर आनन्दित होकर कहा—पुष्प-मालाओं से भूषित हे कुमारो ! समृद्ध देश को त्यागकर आये हुए तुमलोग उज्ज्वल ललाटवाली (सीता) के साथ इसी वन में निवास करो। मैं तुमलोगों की रक्षा करूँगा।

तब सबके हृदयो में निवास करनेवाले (राम) ने (जटायु से) कहा—हे तात ! अगस्त्य महर्षि ने विचार करके, एक अति सुन्दर नदी के तट पर स्थित एक स्थान के बारे में कहा है।

तब जटायु ने कहा—वह महिमापूर्ण स्थान बहुत ही अच्छा है। तुमलोग वहाँ रहकर अपने धर्म का निर्वाह करो। आओ। मैं तुम्हें वह स्थान दिखाता हूँ—यों कहकर उनपर अपने विशाल पक्षों की छाया करता हुआ वह गगन-मार्ग से उड़ने लगा।

परिशुद्ध चित्तवाले तथा दोषहीन गुणवाले उस जटायु ने उन्हें (पंचवटी नामक) उस स्थान को दिखाया और फिर चला गया। उन धनुर्धारी वीरो ने उस सुन्दर उद्यान में अपना निवास बनाया।

वहाँ के राक्षसों के बल को असंदिग्ध रूप से जाननेवाला जटायु उचित ढंग से विचार करके कंचुकाबद्ध स्तनोंवाली वधू (सीता) की एव अपने पुत्र (सदृश राम-लक्ष्मण) की, घोसले में रहनेवाले अपने बच्चों की तरह रक्षा करता रहा। (१-४८)


अध्याय ५

शूर्पणखा पटल

उन वीरो (राम और लक्ष्मण) ने उस गोदावरी नदी को देखा, जो धरती का आभरण थी, उत्तम पदार्थों को प्रदान करनेवाली थी, अनेक धाराओ में प्रवहमाण थी। उष्णता को शांत करनेवाले घाटो से शोभित थी; एव पञ्चविध भंगिमाओं से युक्त थी। (अर्थात्, १. पर्वत, २. अरण्य, ३. नगर, ४. समुद्र, एवं ५. मरु नामक पाँचों प्रदेशों में बहती थी तथा पूर्वोक्त पाँच प्रदेशों में होनेवाले मनुष्य के व्यापारी का वर्णन