कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 346, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३३६ | कम्ब रामायण |
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देखकर पूछा—हे वीर ! इसने क्या अपराध किया था कि तुमने झट इसके कान-नाक काट दिये ? तब शूर तथा उदार गुणवाले (लक्ष्मण) ने उनके चरणों पर नत होकर कहा—
अपने तीक्ष्ण दाँतों से (मांस) खाने के उद्देश्य से या क्रूरकर्मा राक्षसों के उभारने से, न जाने किस कारण से, यह दुर्गुणवाली राक्षसी अपनी आँखों से चिनगारियाँ उगलती हुई अज्ञात रूप से आई और उत्तम गुणवाली देवी (सीता) की ओर क्रोध करके झपटी।
धनुर्धारी लक्ष्मण के अपना कथन समाप्त करने के पूर्व ही, वह क्रूर राक्षसी बोल उठी—हे ऐसे देश के अधिपति, जहाँ के जलाशयों में कीचड़ में स्थित शंखकीट को अपने पति के संग रहते देखकर गर्भिणी मंडूक-स्त्री (ईर्ष्या से) क्रुद्ध हो जल को हिलाने लगती है ! अपनी सौत को देखने पर किस स्त्री का मन क्षुब्ध नहीं होगा ?
(तब राम ने कहा—) भीरुता से (माया) युद्ध करनेवाले क्रूर राक्षसों के विशाल कुल को एक साथ मिटाने के लिए हम यहाँ उनके स्थान को खोजते हुए आ पहुँचे हैं। अब तू कुछ निंदा-वचन कहकर हमारे हाथ से अपने प्राण न गँवा। सत्य के आवासभूत इस वन को छोड़कर तू दूर भाग जा। राम के ये वचन सुनकर भी वह राक्षसी बोल उठी—
जिस बुढ़ापे में बाल पक जाते हैं और (शरीर में) झुर्रियाँ पड़ जाती हैं—ऐसे बुढ़ापे से रहित ब्रह्मा आदि सब देवता, रावण को कर देते हैं। अतः, तुमने जल्दी में जो यह काम कर दिया है, वह उचित नहीं किया। यदि तुम अपनी भलाई चाहते हो, तो सुनो, मैं एक बात कहती हूँ।
वह दशमुख इतना क्रोधी है कि जो कोई जाकर उससे यह कहे कि तुम्हारी बहन की नाक कट गई है, तो वह उस कहनेवाले की जीभ काट ले। अतः, मेरी नाक काटकर तुमलोगों ने अपने कुल की जड़ ही काट दी है। अब तुम्हारे प्राण नहीं बच सकते। हाय ! अपने इस सारे सौंदर्य को तुमने धूल में मिला दिया।
अब स्वर्ग के रक्षकों (देवताओं), पृथ्वी के रक्षकों (राजाओं) और नाग-लोक के रक्षकों में ऐसा कौन है, जो अपने शिरों की रक्षा करते हुए तुमलोगों की देह की भी रक्षा कर सके ? यदि तुम मेरे प्राणों की रक्षा करो (अर्थात्, विरह-पीडा से मेरी रक्षा करो) तो मैं तुम्हारी रक्षा करूँगी। अन्यथा वे रावण हैं (जो तुम्हारा विनाश करेंगे)—यों उस (शूर्पणखा) ने कहा।
उसने आगे कहा—चारित्र्य की रक्षा करनेवाले अचंचल पातिव्रत्य-धर्म से युक्त स्त्रियाँ, अपने महत्त्व को स्वयं नहीं कहती हैं। तो भी मैं, तुम पर अधिक प्रेम होने के कारण, यह कह रही हूँ। क्या तुम अपने इस अनुज को नहीं बतलाओगे कि मैं देवताओं से भी अधिक बलवान् (रावण) की बहन हूँ और संसार के सब प्राणियों से अधिक बलवान् हूँ।
बड़े युद्धों में भी मैं तुमलोगों की रक्षा कर सकती हूँ। तुम्हें उठाकर गगन-मार्ग से जा सकती हूँ। मांस-सदृश स्वादवाले अनेक फल लाकर तुम्हें दे सकती हूँ। तुम्हारे