कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)
Kamba Ramayana Hindi
महाकवि कम्बन द्वारा
स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)
पृष्ठ 435, कुल 549 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रीरंगार्यकाण्डं ४२७
अभिलाषा से यहीं रहती हूँ। आज ही मेरा सुकृत सफल हुआ है। इस प्रकार, शबरी ने कहा। तब उस महातपस्विनी को प्रेम से देखकर राम ने कहा—'हे माता ! हमारे मार्ग-गमन के श्रम को तुमने दूर किया। तुम्हारा श्रेय हो।'
राम तथा उनके अनुज उस दिन वहीं रहे। सब पापनाशक तपस्या करनेवाली (शबरी) ने उन्हें सच्चे प्रेम के साथ देखकर शीघ्रगामी अश्वों से युक्त रथ पर चलनेवाले और उष्णकिरण सूर्य का पुत्र सुग्रीव जिस स्थान पर रहता था, वहाँ जाने का मार्ग पूरे विवरण के साथ बताया।
शास्त्र-श्रवण से जिनके कर्ण पवित्र हुए हैं, ऐसे महात्मा लोग जिस अमृतमय आस्वाद (ब्रह्मानंद) को अपने सूक्ष्म तत्त्व-ज्ञान के द्वारा प्राप्त करते हैं, उस (ब्रह्मानंद) के साकार रूप प्रभु (राम) ने शबरी के उन वचनों को सुना, जो महान् आचार्यों के द्वारा मोक्ष-प्राप्ति के लिए दिये जानेवाले उपदेशों के समान थे।
फिर, वह शबरी बड़ी कठिनाई से संपन्न की गई तपस्या के प्रभाव से अपनी देह का त्याग कर अनुपम मोक्ष-लोक में आनंद से जा पहुँची। उस दृश्य को उन वीरो ने आश्चर्य से देखा। और फिर, उस (शबरी) के कहे मार्ग पर अपने वीर-वलयों को झंकृत करते हुए चल पड़े।
वे (राम-लक्ष्मण), शीतल वनों, पर्वतों तथा विभिन्न दिशाओं को पीछे छोड़ते हुए आगे बढ़ चले और उस पंपा सरोवर के निकट जा पहुँचे, जो ऐसा था, मानों धरती के मानवों के प्रतिदिन आकर उसमें स्नान करने के कारण, उनके प्रभूत पाप-रूपी अग्नि से पुण्य ही पिघलकर उस सरोवर के रूप में रहता हो। (१-६)