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कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

कम्ब रामायण (महाकवि कम्बन - प्रामाणिक हिन्दी अनुवाद)

Kamba Ramayana Hindi

महाकवि कम्बन द्वारा

स्रोत: Kamba Ramayana in Hindi Translation (Vol 1) (उद्गम)

DevanagariHindipublished549 पृष्ठ

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पृष्ठ 439

मंगलाचरण

तीन वर्ण के तीनो गुण (सत्य, रज, तम) वाली मूल प्रकृति, उससे उत्पन्न सब तत्त्व, उस प्रकृति को गोचर करनेवाले नानारूपात्मक लोक तथा इन लोकों में स्थित सब पदार्थ, जिस परब्रह्म का शरीर बने हैं, वही (हमारे) सद्ज्ञान का मधुर विषय बना है, (जिसका चरित्र हम गा रहे हैं)।

अध्याय १

पंपा पटल

वह (पंपा-सरोवर) मधुपूर्ण पुष्पों से भरा था। उसमें रक्तनेत्र एवं उष्ण शुण्ड से युक्त मत्तगज गोते लगाते थे; वह स्वच्छ था। वह ऐसा था, मानों जल से भरा समुद्र बिजली से युक्त मेघो के सहित आकाश को भी साथ लेकर धरती के मध्य आकर विराजमान हो गया हो।

काटकर चिकना किये गये स्फटिक-खंड के समान अति स्वच्छ (उस सरोवर का) शीतल जल, नवविध रत्नों से जडित सीढ़ियोवाले घाटों पर जब-जब तरंगें उठाकर टकराता था, तब-तब वह जल रत्नो की कांति से रंजित होकर, (अनेक शास्त्रो का) विवेचन करके भी सत्यज्ञान से विहीन रहनेवाले लोगों के चित्त की समता करता था।

मुक्ताओं से पूर्ण उस सरोवर के मध्य, प्रवाल-सदृश टाँगोंवाले राजहंस और हंसिनियाँ, एक साथ दृष्टि-गोचर होते थे, जिससे वह सरोवर उस विशाल आकाश के समान दिखता था, जिसमे अनेक राका-चन्द्र उज्ज्वल नक्षत्रो-सहित निखर रहे हों।

वह सरोवर ऐसा लगता था, जैसे अममान गाधिसुत (विश्वामित्र) ने समुद्र से आवृत्त लंक, प्राणिवर्ग तथा वेद-पारग (ब्राह्मण) आदि की प्रतिसृष्टि करते समय, शीतल लवण-समुद्र के बदले मधुर जल से पूर्ण इस (सरोवर) का सर्जन किया हो।